वाराणसी और लखनऊ में माफिया कनेक्शन की चर्चा तेज़। जहरीली कफ सीरप मामले में ईडी की जांच, शुभम जायसवाल पर मढ़ा गया धोखाधड़ी का ठीकरा।
वाराणसी। उत्तर प्रदेश में जहरीली कफ सीरप का मामला इस समय हर ओर चर्चा का विषय बना हुआ है। विभिन्न जाँच एजेंसियाँ इस गंभीर प्रकरण की गहराई से जाँच कर रही हैं। इसी बीच, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक फेसबुक सोशल साइट पर एक चौंकाने वाली अखबार की कटिंग को वायरल कर दिया है। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होते ही, लोगों के बीच एक बड़ी बहस और चर्चा का केंद्र बन गई है।

ईडी की जांच: क्या माफिया की दहशत से वैल्यूअर ने खड़े किए हाथ? – वायरल की गई अखबार की कटिंग में जो जानकारी सामने आई है, वह बेहद सनसनीखेज है। इसमें यह दर्शाया गया है कि ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने आलोक सिंह और शुभम जायसवाल के आवासों की कीमत का पता लगाने के लिए जिन वैल्यूअर (मूल्यांकनकर्ता) को भेजा था, उन्होंने कथित तौर पर माफिया की दहशत की वजह से रिपोर्ट बनाने से इनकार कर दिया।
- बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह के घर पर भेजे गए तीन वैल्यूअर बिना रिपोर्ट बनाए वापस लौट गए। इसके बाद, चौथे वैल्यूअर को खोजकर भेजना पड़ा।
- ठीक इसी तरह, वाराणसी में शुभम जायसवाल के घर की कीमत का पता लगाने गए वैल्यूअर ने भी रिपोर्ट देने से मना कर दिया और वापस चला गया, जिसके कारण लखनऊ से दूसरा वैल्यूअर भेजना पड़ा।
यह घटनाक्रम माफिया के कथित प्रभाव और दहशत को दर्शाता है, जिससे सरकारी अधिकारी भी किनारा कर रहे हैं।
आलोक और अमित ने साधी चुप्पी, सारा ठीकरा शुभम जायसवाल पर फोड़ा – एसटीएफ (STF) की पूछताछ के दौरान, बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह और अमित सिंह ने माफिया से अपने रिश्तों पर पूरी तरह से चुप्पी साधे रखी। हालांकि, फर्जी फर्म बनाने और धोखाधड़ी का सारा ठीकरा उन्होंने मुख्य रूप से शुभम जायसवाल पर फोड़ दिया। दोनों ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि शुभम जायसवाल ने उनके साथ धोखा किया है। आलोक सिंह, जो तीन साल के भीतर 20 करोड़ रुपये का आलीशान मकान बनाने में कामयाब रहे, वह अपनी आय के स्रोत का पता नहीं बता सके। आलोक और अमित का दावा है कि फर्म का सारा काम शुभम ही देखता था। एसटीएफ और एफएसडीए की कार्रवाई के बाद उनके बीच झगड़ा भी हुआ था, जिसके बाद शुभम जायसवाल कथित तौर पर दुबई भाग गया।
महत्वपूर्ण सूचना (डिस्क्लेमर) – bmbreakingnews.com यह स्पष्ट करता है कि हम इस वायरल किये गए पोस्ट या अखबार की कटिंग के सत्य या असत्य होने का कोई दावा नहीं कर रहे हैं। यह संपूर्ण समाचार अखिलेश यादव के फेसबुक पर पोस्ट किये गए अखबार की कटिंग पर आधारित है, जो एक जनचर्चा का विषय बनी हुई है।







