वाराणसी। बच्चों के अधिकारों की रक्षा और महिला अपराधों पर लगाम लगाने के लिए वाराणसी पुलिस लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में कमिश्नरेट वाराणसी में एएचटीयू और विशेष किशोर पुलिस इकाई की मासिक समीक्षा गोष्ठी संपन्न हुई, जिसमें सुरक्षा मानकों और भविष्य की कार्ययोजनाओं पर गंभीर चर्चा की गई।

पुलिस आयुक्त वाराणसी और पुलिस उपायुक्त (अपराध) के निकट पर्यवेक्षण में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता अपर पुलिस उपायुक्त (महिला अपराध) नम्रिता श्रीवास्तव ने की। यातायात पुलिस लाइन सभागार में आयोजित इस कार्यशाला में कमिश्नरेट वाराणसी में एएचटीयू और विशेष किशोर पुलिस इकाई की मासिक समीक्षा गोष्ठी संपन्न कराते हुए अधिकारियों ने ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ और ‘नशा मुक्त बचपन’ जैसे संकल्पों को दोहराया।

इस मासिक बैठक में चाइल्ड लाइन, बेसिक खण्ड शिक्षा अधिकारी, ए.एच.टी.यू. (Anti-Human Trafficking Unit) और एस.जे.पी.यू. (Special Juvenile Police Unit) के साथ-साथ सभी थानों के बाल कल्याण अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

गोष्ठी के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई: SOP का पालन: महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन उत्तर प्रदेश द्वारा जारी अनुसंधान एवं अभियोजन के मानकों (SOP) पर चर्चा। पाक्सो एक्ट (POCSO): पाक्सो एक्ट के तहत पंजीकृत मामलों में समय पर आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल करने और दिशा-निर्देशों के सख्त पालन के निर्देश। पीड़िता आवासन एवं अनुदान: पीड़ित बच्चियों के आवासन और रानी लक्ष्मीबाई अनुदान योजना का लाभ दिलाने पर जोर। बाल श्रम एवं भिक्षावृत्ति: वाराणसी को बाल श्रम और भिक्षावृत्ति से मुक्त करने के लिए चलाए जा रहे अभियानों की समीक्षा।

कमिश्नरेट वाराणसी में एएचटीयू और विशेष किशोर पुलिस इकाई की मासिक समीक्षा गोष्ठी संपन्न होने के दौरान अपर पुलिस उपायुक्त ने गुमशुदा बच्चों के लंबित मामलों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने निर्देशित किया कि थानों के बाल कल्याण अधिकारी और विवेचक आपसी समन्वय स्थापित कर बच्चों की सकुशल बरामदगी सुनिश्चित करें। भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने पर चर्चा हुई।

नम्रिता श्रीवास्तव ने कहा कि संयुक्त कार्ययोजना के तहत ही हम इन सामाजिक बुराइयों को जड़ से मिटा सकते हैं।जे.जे. एक्ट (Juvenile Justice Act) से संबंधित नए आदेशों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और विवेचकों के समक्ष आ रही समस्याओं के समाधान के लिए भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *