अपना दल (कमेरावादी) ने ADG से मिलकर की जिलाध्यक्ष मामले में CBCID जांच की मांग
मिर्जापुर के जिलाध्यक्ष श्याम बहादुर पटेल की गिरफ्तारी के खिलाफ अपना दल (कमेरावादी) का प्रतिनिधिमंडल ADG पियूष मोर्डिया से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल पर दबाव का आरोप लगाते हुए CBCID जांच की मांग की है।
वाराणसी। उत्तर प्रदेश की राजनीति और पुलिसिया कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। अपना दल (कमेरावादी) का एक तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार को वाराणसी में अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) पियूष मोर्डिया से मिला। इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा मिर्जापुर के जिलाध्यक्ष श्याम बहादुर पटेल की गिरफ्तारी और पुलिस की कार्यप्रणाली पर विरोध दर्ज कराना था।
प्रतिनिधिमंडल ने ADG को अवगत कराया कि मिर्जापुर के संतनगर थाना पुलिस ने अत्यंत राजनीतिक दबाव में आकर जिलाध्यक्ष श्री श्याम बहादुर पटेल के खिलाफ कार्रवाई की है। आरोप है कि एफ.आई.आर. (FIR) में नाम न होने के बावजूद उन्हें गलत तरीके से जेल भेजा गया। अपना दल (कमेरावादी) का स्पष्ट कहना है कि यह कार्रवाई निष्पक्ष नहीं बल्कि राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है।
प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के अनुसार: स्थानीय पुलिस प्रशासन पूर्ण रूप से सत्ताधारी कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल के भारी दबाव में काम कर रहा है। जब तक जांच स्थानीय पुलिस के हाथ में रहेगी, न्याय की उम्मीद कम है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सीबीसीआईडी (CBCID) जांच अथवा किसी दूसरे जिले के उच्चस्तरीय अधिकारी से जांच कराना अत्यंत आवश्यक है।
“जब FIR में नाम ही नहीं है, तो गिरफ्तारी किस आधार पर की गई? यह सीधे तौर पर विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश है।” — प्रतिनिधिमंडल के सदस्य
ADG पियूष मोर्डिया से मिलने पहुंचे इस तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में अनुभवी और कद्दावर नेता गगन प्रकाश यादव एडवोकेट (प्रदेश महासचिव), राजेश प्रधान (प्रदेश अध्यक्ष, किसान मंच), सुरजीत सिंह (पूर्व प्रत्याशी, घोरावल विधानसभा) शामिल रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई है कि ADG इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ मामले की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करेंगे। अपना दल (कमेरावादी) ने साफ कर दिया है कि अगर उनके कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो वे इस लड़ाई को और तेज करेंगे।



