वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले से पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामला चौबेपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली जाल्हूपुर पुलिस चौकी से जुड़ा है, जहाँ एक पीड़ित ने चौकी इंचार्ज और स्थानीय पुलिस पर विपक्षी पक्ष के साथ मिलकर उसकी लीज की जमीन और पोल्ट्री फार्म पर जबरन कब्जा कराने का गंभीर आरोप लगाया है।

क्या है पूरा मामला? प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम अमौली के निवासी पंकज सिंह ने न्याय की गुहार लगाते हुए बताया कि उन्होंने मौजा अमौली में स्थित एक जमीन का लगभग 6000 वर्गफीट हिस्सा वर्ष 2022 में 10 वर्षों के लिए लीज (पट्टे) पर लिया था। इस जमीन पर उन्होंने भारी निवेश कर एक पोल्ट्री फार्म स्थापित किया और अपना स्वरोजगार शुरू किया।

पंकज सिंह का कहना है कि वह अनुबंध के अनुसार नियमित रूप से किराया दे रहे हैं। वर्तमान में यह किराया वार्षिक बढ़ोतरी के साथ 6,945 रुपये तक पहुंच चुका है। समझौते के तहत अभी लीज की अवधि काफी शेष है, लेकिन आरोप है कि जमीन मालिक कैलाश नाथ सिंह की नीयत में खोट आ गया है और वह समय से पहले ही जमीन खाली कराना चाहते हैं।

चौकी इंचार्ज मनीष चौधरी पर मिलीभगत के आरोप पीड़ित पंकज सिंह ने सीधे तौर पर जाल्हूपुर चौकी इंचार्ज मनीष चौधरी की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि 23 अप्रैल 2026 को विपक्षी पक्ष ने जमीन पर ईंट-बालू गिराकर बाउंड्रीवाल खड़ी करनी शुरू कर दी और अवैध रूप से कब्जा करने का प्रयास किया।

पंकज का दावा है कि मामले की बार-बार शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। चौकी इंचार्ज विपक्षी का पक्ष ले रहे हैं और पीड़ित को ही प्रताड़ित किया जा रहा है। चौकी पर तैनात इंस्पेक्टर कुंवर दिलीप पर भी विपक्षी से रिश्तेदारी होने के कारण मिलीभगत का संदेह जताया गया है।

न्याय के लिए उच्चाधिकारियों से गुहार पीड़ित के अनुसार, उन्होंने 25 अप्रैल 2026 को थाना प्रभारी चौबेपुर को भी लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस के ढुलमुल रवैये के कारण विपक्षियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। स्थिति यह है कि अवैध निर्माण और कब्जा बदस्तूर जारी है।

“मैने अपनी मेहनत की कमाई इस पोल्ट्री फार्म में लगाई है। अगर पुलिस ही रक्षक के बजाय भक्षक बन जाए, तो आम आदमी कहाँ जाएगा?” — पीड़ित पंकज सिंह

इस मामले ने स्थानीय पुलिस की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित ने वाराणसी के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे को तत्काल हटवाया जाए। दोषी पुलिसकर्मियों और विपक्षी पक्ष के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किसी उच्च अधिकारी से कराई जाए।

    अब देखना यह होगा कि क्या वाराणसी पुलिस प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर पीड़ित को न्याय दिलाता है या जाल्हूपुर चौकी पर लगे ये आरोप फाइलों में दबकर रह जाएंगे।

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