उत्तर प्रदेश की राजनीति में अक्सर तीखी बयानबाजी और तकरार देखने को मिलती है, लेकिन हाल ही में एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने राजनीति से ऊपर उठकर मानवीय संवेदनाओं की मिसाल पेश की है। बहराइच से बीजेपी विधायक अनुपमा जायसवाल एक दुखद हादसे का शिकार हो गई थीं, जिसके बाद अब समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे।

कैसे हुआ हादसा? प्रदर्शन के दौरान झुलसीं अनुपमा जायसवाल – घटना 25 अप्रैल की है, जब बहराइच में बीजेपी विधायक अनुपमा जायसवाल अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन कर रही थीं। जानकारी के अनुसार, विधायक जी समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव का पुतला दहन कर रही थीं। इसी दौरान अचानक आग की लपटें तेज हो गईं और बीजेपी विधायक अनुपमा जायसवाल उसकी चपेट में आ गईं।

इस दर्दनाक हादसे में उनके चेहरे और बाल झुलस गए। मौके पर मौजूद समर्थकों ने तुरंत उन्हें संभाला और नजदीकी अस्पताल ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए लखनऊ के मेदांता अस्पताल में रेफर कर दिया गया।

अखिलेश यादव ने निभाया ‘राजनीतिक धर्म’, मेदांता जाकर जाना हाल – मंगलवार को लखनऊ के मेदांता अस्पताल में एक सुखद और सकारात्मक दृश्य देखने को मिला। जिस नेता का पुतला फूंकते समय यह हादसा हुआ, वही नेता यानी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, घायल बीजेपी विधायक अनुपमा जायसवाल का हालचाल जानने अस्पताल पहुंच गए।

अखिलेश यादव ने पूर्व बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल से मुलाकात की और उनके डॉक्टरों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने विधायक के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा: “हम नहीं चाहते हैं कि समाज के बीच आग जले। हम चाहते हैं समाज में सौहार्द की फुहार हो। हमारी सकारात्मक राजनीति की स्वस्थ परंपरा ने हमें यही सिखाया है। इसीलिए हम भाजपा विधायक श्रीमती अनुपमा जायसवाल जी से मिलने गये और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करके आएं हैं। राजनीति अपनी जगह है और मानवीय संबंधों का महत्व अपनी जगह।”

अक्सर देखा जाता है कि राजनीतिक विचारधाराएं अलग होने के कारण नेताओं के बीच काफी दूरियां होती हैं। लेकिन बीजेपी विधायक अनुपमा जायसवाल के हादसे पर अखिलेश यादव का यह कदम एक “सकारात्मक राजनीति” का परिचय देता है। सोशल मीडिया पर भी लोग अखिलेश यादव के इस व्यवहार की सराहना कर रहे हैं, जहाँ उन्होंने स्पष्ट किया कि विचारधारा की लड़ाई अपनी जगह है, लेकिन इंसानियत और सौहार्द सबसे ऊपर है।

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