वाराणसी: उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में इन दिनों अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। एक तरफ जहाँ वाराणसी पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर शहर के बीचों-बीच सट्टे का काला कारोबार फल-फूल रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर कौन है ये सट्टा संचालक जिसे नहीं पुलिस का कोई खौफ? क्या इसमें वाराणसी पुलिस की मिलीभगत तो नहीं!

पुलिस कमिश्नर के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे सट्टा माफिया – बताते चलें कि वाराणसी जनपद के पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के द्वारा जहाँ अपराध व अपराधियों पर लगाम लगाने के लिये मातहतों को कड़े निर्देश दिये गये हैं, तो वहीं गैरकानूनी कार्य करने वाले लोग पुलिस की आंखों में धूल झोंककर अवैध तरीके से जुये व सट्टे का काला कारोबार करने से बाज नहीं आ रहे हैं। भले ही कागजों पर पुलिस की सख्ती दिखती हो, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। आखिर वह कौन सी ताकत है जो इन सट्टा संचालकों को अभयदान दे रही है?

इन इलाकों में सज रही है सट्टे की महफिल (Ground Report) – हमारे विश्वसनीय सूत्रों के द्वारा जो जानकारी दी गयी है, वह चौंकाने वाली है। शहर के रिहाइशी और व्यस्त इलाकों में सट्टे का खेल खुलेआम खेला जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक निम्नलिखित स्थानों पर रोजाना लाखों का वारा-न्यारा हो रहा है : औरंगाबाद: सलाउद्दीन बाबा के कब्रिस्तान पर। खुद्दीद्वार लल्लापुरा: मैदान में स्थित सलीम शैतान के मकान में। लल्लापुरा: पौसरा पर मुस्लिम स्कूल के पहले। पीलीकोठी: कब्रिस्तान परिसर में। शिवाला: पार्क में व के पास। खोजवां: शंकुलधारा पोखरा के समीप। गुरूधाम: मोमोज की दुकान लेबर सट्टी के सामने। पानदरीबा: पुलिस चौकी के अंतर्गत महाराजा स्कूल के पास रहीम शाह बाबा के सामने।

इन जगहों पर रोजाना जुआ और सट्टा खिलवाया जा रहा है, जिससे न केवल कानून की धज्जियां उड़ रही हैं, बल्कि युवा पीढ़ी भी बर्बादी की कगार पर है।

एसओजी (SOG) की भूमिका पर उठते गंभीर सवाल – अब यदि बात की जाये तो पुलिस आयुक्त के द्वारा SOG 1, 2 व 3 का गठन जनपद में चल रहे अनैतिक व गैरकानूनी कार्यों पर लगाम लगाने के लिये किया गया है। लेकिन इन सक्रिय टीमों की मौजूदगी के बावजूद सट्टे का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा।

ऐसा प्रतीत होता है कि ये एसओजी की टीमें अपने आंखों पर धृतराष्ट्र रूपी पट्टी बांधे हुये हैं, जिनसे ये काला कारोबार दिखायी नहीं दे रहा। क्या ये टीमें वाकई अनजान हैं या फिर “सब जानकर भी अनजान” बनने का नाटक किया जा रहा है? जनता के बीच चर्चा है कि क्या इसमें वाराणसी पुलिस की मिलीभगत तो नहीं!

कार्रवाई या केवल आश्वासन? – वाराणसी जैसे हाई-प्रोफाइल शहर में इस तरह खुलेआम सट्टा चलना पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा दाग है। अब इस पर वाराणसी पुलिस क्या कार्रवाई करेगी ये तो भविष्य के गर्भ में है। क्या पुलिस आयुक्त इन सट्टा संचालकों और उनके मददगारों पर चाबुक चलाएंगे?

फिलहाल, बीएम ब्रेकिंग न्यूज (bmbreakingnews.com) की पड़ताल जारी है। हम इस काले कारोबार के हर चेहरे को बेनकाब करते रहेंगे।

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