वाराणसी: धर्म की नगरी काशी में गौवंश की सुरक्षा को लेकर एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वाराणसी नगर निगम पशु तस्करी मामले को लेकर जनराज्य पार्टी ने सीधे तौर पर नगर निगम प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। जनराज्य पार्टी के जिलाध्यक्ष ऋषि जायसवाल ने नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों पर साठगांठ का आरोप लगाते हुए कहा है कि कांजी हाउस से गौवंश को तस्करी के लिए बाहर भेजा जा रहा है।
कांजी हाउस से आधी रात को गौवंश निकालने का आरोप – जनराज्य पार्टी के जिलाध्यक्ष ऋषि जायसवाल के अनुसार, यह पूरा प्रकरण वाराणसी नगर निगम पशु तस्करी मामले से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि बीती 12/13 अप्रैल 2026 की दरमियानी रात नक्खीघाट स्थित नगर निगम के कांजी हाउस से लगभग 7-8 बछड़ों को निगम के ही वाहन से बाहर निकाला गया। आरोप है कि इस अवैध निकासी में पशु संचल दस्ता के वाहन चालक सतीश कुमार, मुंशी कैलाश पाण्डेय और रात्रि कर्मचारी राजेश यादव की मुख्य भूमिका रही है।
क्या डॉ. संतोष पाल के इशारे पर हो रहा है खेल? – ऋषि जायसवाल ने इस वाराणसी नगर निगम पशु तस्करी मामले में पशु चिकित्सक डॉ. संतोष पाल पर भी गंभीर उंगली उठाई है। उनका दावा है कि इन बछड़ों को डॉक्टर के इशारे पर ही बाहर निकाला गया और बाबतपुर के आगे किसी सुनसान स्थान पर ले जाकर छोड़ दिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके पास वाहन चालक सतीश कुमार के साथ हुई बातचीत के पुख्ता साक्ष्य (Audio/Evidence) सुरक्षित हैं, जिसमें चालक ने कथित तौर पर स्वीकार किया है कि ऐसी घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं।
बेजुबानों की सुरक्षा पर उठे सवाल – इस वाराणसी नगर निगम पशु तस्करी मामले ने शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी झकझोर दिया है। जिलाध्यक्ष का अंदेशा है कि आवारा छोड़ने के नाम पर इन बेजुबानों को असल में पशु तस्करों के हवाले कर दिया गया है। जहाँ एक ओर सरकार गौवंश संरक्षण के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं वाराणसी नगर निगम के भीतर इस तरह के आरोपों ने प्रशासन की साख पर बट्टा लगा दिया है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग – जनराज्य पार्टी ने निगम प्रशासन और शासन से पुरजोर मांग की है कि इस वाराणसी नगर निगम पशु तस्करी मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए ताकि काशी जैसे पवित्र शहर में गौवंश के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को रोका जा सके। फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तूल पकड़ता जा रहा है।




