वाराणसी जनपद का भेलूपुर थाना एक बार फिर अपनी कार्यशैली और कथित अनदेखी को लेकर चर्चाओं के बाजार में गर्म है। इस बार मामला किसी आम अपराध का नहीं, बल्कि आगामी बकरीद पर्व के मद्देनजर नियमों को ताक पर रखकर सजाए गए एक अवैध कारोबार का है। ताजा मामला अशफाक नगर इलाके से सामने आया है, जहाँ स्थानीय प्रशासन की ‘कथित कृपा दृष्टि’ के चलते एक सार्वजनिक मैदान में भेलूपुर थाना क्षेत्र में अवैध बकरा मार्केट धड़ल्ले से संचालित किया जा रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा इलाका घनी आबादी वाला है। यहाँ बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति और सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी करते हुए बड़े पैमाने पर बकरा मंडी लगाई जा रही है। लेकिन, स्थानीय भेलूपुर पुलिस इस गंभीर मामले पर अपनी आँखें बंद किए बैठी है।
रसूखदार का तंत्र और वसूली का ‘सुनियोजित ढांचा’ – भेलूपुर थाना क्षेत्र में अवैध बकरा मार्केट के संचालन के पीछे एक स्थानीय कथित रसूखदार का नाम तेजी से उभरकर सामने आ रहा है। ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी और पड़ताल में इस बाजार में व्यापारियों से की जा रही अवैध वसूली का एक ऐसा सुनियोजित ढांचा उजागर हुआ है, जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।
क्षेत्रीय लोगों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस मंडी में आने वाले हर एक जानवर (बकरे) के एवज में ₹500 का अनिवार्य शुल्क वसूला जा रहा है। इस मोटी रकम की बंदरबांट का गणित कुछ इस प्रकार है : ₹50 दलाल का हिस्सा: यह रकम उस बिचौलिए या दलाल को दी जाती है, जो बाहर से व्यापारियों और उनके जानवरों को फुसलाकर इस मैदान तक लेकर आता है। ₹50 ‘सिस्टम’ का हिस्सा: यह राशि उस बिचौलिए की जेब में जाती है, जो स्थानीय स्तर पर ‘सिस्टम’ (यानी पुलिस और प्रशासनिक कारिंदों) को ‘मैनेज’ करने का दम भरता है। ₹400 कथित रसूखदार की जेब में: वसूली की यह सबसे बड़ी और मुख्य रकम सीधे तौर पर इस अवैध बाजार का संचालन करने वाले स्थानीय कथित रसूखदार के खाते में जा रही है।
कब्रिस्तान के नाम पर खुद की ‘देखभाल’! – स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस भारी-भरकम और गैर-कानूनी वसूली को जायज ठहराने के लिए आयोजकों द्वारा एक अजीबोगरीब और इमोशनल तर्क दिया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इस पैसे का इस्तेमाल ‘कब्रिस्तान की देखभाल’ के लिए किया जाएगा।
हालाँकि, जमीन से जुड़े इलाके के प्रबुद्ध और जागरूक नागरिकों का साफ कहना है कि यह देखभाल कब्रिस्तान की नहीं, बल्कि खुद की जेबें भरने और खुद की ‘देखभाल’ के लिए की जा रही है। धर्म और समाज की आड़ में चल रहा यह खेल अब धीरे-धीरे बेनकाब होने लगा है।
इलाके में चर्चा: क्या ‘फैंटम’ की गश्त सिर्फ कागजों पर है? स्थानीय गलियारों में चल रही चर्चाओं को सच मानें तो इस अवैध कारोबार को बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए स्थानीय पुलिस की विशेष विंग, खास तौर पर ‘फैंटम’ (पुलिस गश्त टीम) को कथित रूप से पूरी तरह ‘मैनेज’ करके रखा गया है। यही वजह है कि रोज रूटीन गश्त का दावा करने वाली पुलिस को इस सार्वजनिक मैदान में चल रहा इतना बड़ा अवैध मेला दिखाई ही नहीं देता।
BM Breaking News यहाँ स्थानीय पुलिस पर सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं लगा रहा है। लेकिन, नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर स्थानीय लोगों ने प्रशासन के सामने कुछ बेहद गंभीर और वाजिब सवाल खड़े किए हैं : इतनी घनी आबादी के बीच, बिना किसी सुरक्षा इंतजाम और वैध परमिशन के इतना संवेदनशील और भेलूपुर थाना क्षेत्र में अवैध बकरा मार्केट आखिर किसके आदेश व निर्देश पर लगाया गया है? यदि यहाँ कोई अप्रिय घटना या सुरक्षा चूक होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस के उच्चाधिकारियों की नजर इस अवैध वसूली और सिस्टम के खेल पर पड़ेगी?
अब देखना यह होगा कि वाराणसी के आला अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर इस अवैध तंत्र और वसूली के खेल पर कोई दंडात्मक कार्रवाई करते हैं, या फिर कथित रसूखदारों का यह अवैध साम्राज्य इसी तरह कानून की धज्जियाँ उड़ाता रहेगा। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करना भेलूपुर पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी दोनों है।





