अदालत में बचाव पक्ष की ओर से शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी, अनुज यादव और आदित्य वर्मा ने मजबूती से पक्ष रखा
वाराणसी। उत्तर प्रदेश की न्यायिक नगरी वाराणसी से इस वक्त एक बड़ी कानूनी खबर सामने आ रही है। वाराणसी में हाईटेक तरीके से आईपीएल मैच में सट्टेबाजी करने और करोड़ों रुपए का दांव लगाने के मामले में मुख्य संचालक समेत दो आरोपियों को अदालत से बहुत बड़ी राहत मिल गई है। वाराणसी के जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुख्य आरोपी और संचालक को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी कर दिया है।
जिला जज की अदालत से मिली बड़ी राहत – वाराणसी में ऑनलाइन आईपीएल मैच में सट्टेबाजी के इस हाईप्रोफाइल मामले की सुनवाई करते हुए जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने मूल रूप से मुंबई (महाराष्ट्र) और वर्तमान में वाराणसी के सिंधौरा निवासी आरोपी अमन सिंह, तथा दिलावलपुर (कपसेठी) निवासी मुख्य संचालक रितेश दिवाकर शुक्ला की जमानत अर्जी को स्वीकार कर लिया। अदालत ने दोनों आरोपियों को 50-50 हजार रुपए की दो स्थानीय जमानतें और इतनी ही धनराशि का व्यक्तिगत बंधपत्र (Personal Bond) दाखिल करने पर जेल से रिहा करने का आदेश दिया है।
अदालत में बचाव पक्ष की ओर से शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी, अनुज यादव और आदित्य वर्मा ने मजबूती से पक्ष रखा, जिसके बाद कोर्ट ने यह राहत दी।
क्या था पूरा मामला और पुलिस की छापेमारी? – अभियोजन पक्ष की कहानी के अनुसार, यह पूरा मामला वाराणसी के कैंट थाने से जुड़ा हुआ है। 1 जून 2026 को कैंट थाने के उपनिरीक्षक गौरव कुमार सिंह को एक पुख्ता सूचना मिली थी कि कुछ लोग महावीर मंदिर के पास, टकटकपुर की ओर जाने वाली अंदरूनी गली में स्थित ‘सिद्धि हाइट्स’ के बेसमेंट में गुपचुप तरीके से ऑनलाइन आईपीएल मैच में सट्टेबाजी का बड़ा खेल चला रहे हैं।
सूचना के आधार पर जब पुलिस टीम ने सिद्धि हाइट्स के बेसमेंट में छापेमारी की, तो वहां हड़कंप मच गया। पुलिस ने मौके से करीब 13 लोगों को रंगे हाथों धर दबोचा था।
‘आरडी डिजिटल’ एजेंसी की आड़ में चल रहा था खेल – पुलिस पूछताछ में पकड़े गए लोगों ने अपना नाम रितेश दिवाकर शुक्ला, रवि यादव, अर्पित तिवारी, अमन सिंह, विकास पटेल, जियाउलहक जैनुलआब्दीन, सचिन सिंह, गौरव चौहान, देवेश, अनिकेत कुमार, अमित तिवारी, सौरभ चौहान और राहुल मौर्या बताया था।
जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि ये लोग आईपीएल मैच में सट्टेबाजी के इस अवैध धंधे को एक कॉर्पोरेट लुक देकर चला रहे थे : आरोपियों ने बताया कि वे लोग ‘आरडी डिजिटल’ (RD Digital) नाम से एक एड एजेंसी चलाते हैं। इस एजेंसी का आधिकारिक काम विभिन्न कंपनियों, फर्मों और वेबसाइटों से संपर्क कर उनका प्रमोशन करना था। लेकिन इस काम की आड़ में इनकी टीम विभिन्न ऑनलाइन बेटिंग (Betting) वेबसाइट्स के लिंक तैयार कर उन्हें अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल करती थी। इन लिंक्स के जरिए लोग सट्टा वेबसाइट्स पर जाकर रजिस्टर होते थे। इसके बाद यह गैंग लोगों को आईडी (ID) बेचकर आईपीएल मैच में सट्टेबाजी का काम करवाता था।
फर्जी आईडी और भारी मात्रा में गैजेट्स बरामद – पुलिस की तफ्तीश में सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी नाम और पतों के आधार पर कई फेसबुक पेज और सोशल मीडिया आईडी बना रखी थीं, जो उनके मोबाइल फोन और लैपटॉप में लगातार लॉगिन थीं। इन्हीं फर्जी क्रेडेंशियल्स के माध्यम से वाराणसी में बैठकर आईपीएल मैच में सट्टेबाजी का यह बड़ा सिंडिकेट ऑपरेट किया जा रहा था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से कुल 1350 रुपए नगद, 17 अदद मोबाइल फोन और 10 अदद हाई-टेक लैपटॉप बरामद किए थे।
फिलहाल, इस मामले के मुख्य किरदारों को जिला अदालत से जमानत मिल जाने के बाद इस केस में एक नया मोड़ आ गया है। बचाव पक्ष के वकीलों की दलीलों को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने राहत दे दी है, जिसके बाद अब आरोपियों की जेल से बाहर आने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।




