पोस्टमार्टम रिपोर्ट: आग की लपटों से ज्यादा खतरनाक साबित हुआ धुआं
लखनऊ। अलीगंज हादसा का शिकार हुए लोगों का जब डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया, तो पाया कि किसी भी मृतक के शरीर पर न तो कोई गंभीर चोट के निशान थे और न ही उनके शरीर आग में झुलसे थे। डॉक्टरों के मुताबिक, इन सभी 15 लोगों की मौत दम घुटने (Asphyxiation) के कारण हुई थी।
इमारत के भीतर बंद जगह में आग लगने के कारण ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरा। डॉक्टरों ने बताया कि मृतकों के नाक के अंदर कालिख और धुएं के भारी कण पाए गए हैं। प्लास्टिक, फोम और सिंथेटिक सामानों के जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन साइनाइड जैसी बेहद जहरीली गैसें निकलीं, जिसने पलक झपकते ही वहां मौजूद बच्चों को बेहोश कर दिया और उन्हें बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।
चंद रुपयों के लालच ने ली 15 मासूमों की जान! = जांच में सामने आया है कि अलीगंज सेक्टर-डी की जिस चार मंजिला इमारत में यह अलीगंज अग्निकांड हुआ, वहां सालों से कमर्शियल एक्टिविटीज चल रही थीं। दमकल विभाग के नियमों के अनुसार हर तीन साल में कमर्शियल बिल्डिंग्स का इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट होना अनिवार्य है।
लेकिन इमारत के मालिक और वहां चल रहे ‘हैक्सार स्टूडियो’ (Hexar Studio) के संचालकों ने चंद रुपये बचाने के चक्कर में कभी बिजली विभाग से ऑडिट ही नहीं कराया। इसी लापरवाही का नतीजा रहा कि तारों पर ओवरलोडिंग बढ़ती गई और अंततः शॉर्ट सर्किट इस भयानक तबाही का कारण बना।
किसी की टूटी रीढ़, तो किसी का उजड़ गया संसार = इस अलीगंज अग्निकांड की मानवीय कहानियां आंखें नम कर देने वाली हैं। कोचिंग सेंटर में एनीमेशन ट्रेनर के रूप में काम करने वाले जयंत गुप्ता ने जब खुद को आग की लपटों से घिरा पाया, तो जान बचाने के लिए वो दूसरी मंजिल से कूद गए। वो नीचे रखे जनरेटर पर गिरे, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और हाथ झुलस गए। फिलहाल वो ट्रॉमा सेंटर के ICU में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। जयंत के पिता प्रदीप गुप्ता (PWD से सेवानिवृत्त) ने रोते हुए बताया कि घर में सिर्फ वो और उनका इकलौता बेटा ही हैं। जयंत की मां का 4 साल पहले निधन हो चुका है और इस साल वो जयंत की शादी की तैयारियां कर रहे थे।
अस्पताल से राहत: हालांकि, इसी हादसे में घायल हुईं दिल्ली की लवप्रीत कौर की हालत अब खतरे से बाहर है और डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें जल्द ही डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। जयंत का इलाज भी न्यूरो सर्जरी और हड्डी रोग विशेषज्ञों की देखरेख में पूरी तरह मुफ्त किया जा रहा है।
इस भीषण लखनऊ अलीगंज हादसे के बाद अब शासन और प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है : फॉरेंसिक और SIT जांच: फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं, जिसमें प्राथमिक तौर पर शॉर्ट सर्किट से आग लगने की पुष्टि हुई है। दोषी भेजे गए जेल: पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 6 नामजद आरोपियों में से 4 को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला, एनीमेशन सेंटर संचालक तुषांक कृष्ण जायसवाल, पेटशॉप मालिक रामकृष्ण उपाध्याय और सुरेश कुमार शामिल हैं, जिन्हें अदालत ने जेल भेज दिया है। फरार धीरेंद्र और सुरेंद्र शुक्ला की तलाश में दबिश दी जा रही है। कोचिंग सेंटरों की जांच: उच्च शिक्षा विभाग ने 4 जांच कमेटियां बनाई हैं, जो ‘उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम 2002’ और ‘केंद्र सरकार गाइडलाइंस 2024’ के तहत शहर के सभी कोचिंग सेंटरों के मानकों की जांच करेंगी। जिन सेंटर्स के मानक पूरे नहीं होंगे, उनका रजिस्ट्रेशन तुरंत निरस्त किया जाएगा।
निष्कर्ष: सबक कब लेंगे हम? = अलीगंज अग्निकांड (Aliganj Agnikand) सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था और सुरक्षा मानकों के प्रति बरती गई घोर लापरवाही का नतीजा है। जब तक मकान मालिक और संस्थान संचालक सुरक्षा ऑडिट को गंभीरता से नहीं लेंगे, तब तक मासूम जिंदगियां यूं ही दांव पर लगती रहेंगी। प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को सहायता राशि सौंप दी है, लेकिन क्या यह सहायता उन परिवारों का अकेलापन दूर कर पाएगी?




