वाराणसी। उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली कानूनी खबर सामने आ रही है। वाराणसी से प्रकाशित होने वाले प्रसिद्ध साध्य दैनिक समाचार पत्र ‘गांडीव’ की मालकिन और उनके सहयोगियों पर कानून का शिकंजा कस गया है। धोखाधड़ी और जालसाजी के एक गंभीर मामले में गांडीव अखबार मालकिन जेल भेज दी गई हैं।
वाराणसी के विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कृष्ण कुमार की अदालत ने इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की रिमांड स्वीकृत कर दी है और उन्हें 14 दिनों के लिए न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश जारी किया है। इस कार्रवाई के बाद से स्थानीय मीडिया और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।
क्या है पूरा मामला? = can be checked, is directly related to a land dispute. चौक थाना क्षेत्र के मुकदमा अपराध संख्या 99/2026 के तहत दर्ज इस मामले में पीड़ित आनंद कृष्ण अग्रवाल ने चौक थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई थी।
अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत में जो कहानी पेश की गई, वह बेहद चौंकाने वाली है। आरोप है कि समाचार पत्र की मालिक रचना अरोड़ा, मीरा अरोड़ा और उनके सहयोगी कर्मचारी राज कुमार बाजपेई ने मिलकर एक गहरी साजिश रची। इन लोगों ने कथित तौर पर फर्जी और कुटरचित (जाली) दस्तावेज तैयार किए। इन फर्जी कागजातों के सहारे आरोपियों ने रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) की सरकारी संपत्ति को अपनी निजी संपत्ति घोषित कर दिया। इतना ही नहीं, इस सरकारी जमीन को अपनी बताकर आरोपियों ने वादी आनंद कृष्ण अग्रवाल के साथ 3 करोड़ रुपये का सौदा कर लिया और विक्रय अनुबंध (Sale Agreement) भी कर लिया।
अदालत में अभियोजन अधिकारी ने रखा प्रभावी पक्ष = मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए अभियोजन अधिकारी मधुसूदन तिवारी ने अदालत के सामने बेहद जोरदार और प्रभावी ढंग से दलीलें पेश कीं। उन्होंने न्यायालय को अवगत कराया कि यह मामला सिर्फ एक साधारण धोखाधड़ी का नहीं है, बल्कि इसमें देश की रक्षा मंत्रालय जैसी महत्वपूर्ण संस्था की संपत्ति के फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए हैं, जो कि एक अत्यंत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। अभियोजन अधिकारी की कड़ी दलीलों और पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपियों को किसी भी प्रकार की राहत देने से साफ इनकार कर दिया।
जमानत याचिका खारिज, इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा = गांडीव अखबार मालकिन जेल जाने के इस मामले में आरोपियों की तरफ से अदालत में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था। लेकिन विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कृष्ण कुमार ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उनके जमानत प्रार्थना पत्र को सिरे से खारिज कर दिया।
न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आरोपियों की रिमांड स्वीकृत की है। जिन धाराओं में यह कार्रवाई की गई है, वे इस प्रकार हैं : धारा 316(2) (Cheating/धोखाधड़ी), धारा 352 & 351(2) (Forgery of documents/दस्तावेजों की जालसाजी), धारा 338, 339, 340(2) (फर्जी दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करना), धारा 61(2) (Criminal Conspiracy/अराधिक षड्यंत्र) इन सभी धाराओं के तहत रिमांड मंजूर करते हुए न्यायालय ने गांडीव अखबार की मालिक रचना अरोड़ा, मीरा अरोड़ा और उनके सहयोगी कर्मचारी राज कुमार बाजपेई को 14 दिनों के लिए जेल (न्यायिक अभिरक्षा) भेजने का वारंट जारी कर दिया।
शहर में चर्चा का विषय बनी यह कार्रवाई = एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र से जुड़े बड़े नामों का इस तरह से जालसाजी के मामले में सामने आना और फिर गांडीव अखबार मालकिन जेल की सलाखों के पीछे पहुंच जाना, इस समय वाराणसी में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, वहीं पुलिस अब इस मामले में आगे की कानूनी कड़ियों को जोड़ने में जुट गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस खेल में कुछ और लोग भी शामिल थे या नहीं।




