अमिताभ ठाकुर ने अपने अधिवक्ता अनुज यादव के जरिए विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) की अदालत में एक अर्जी दाखिल की
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के पूर्व आईपीएस अधिकारी और आजाद सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर एक बार फिर चर्चा में हैं। वाराणसी के चौक थाने में दर्ज एक आपराधिक मामले को लेकर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। अमिताभ ठाकुर ने अपने वकील अनुज यादव के जरिए विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) की अदालत में एक अर्जी दाखिल की है। इस अर्जी के जरिए उन्होंने पुलिस की ढीली कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की प्रगति रिपोर्ट (Progress Report) तलब करने की मांग की है। अदालत ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए चौक थाना पुलिस से आख्या (रिपोर्ट) मांगी है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 जुलाई की तारीख तय कर दी है।

क्या है पूरा मामला और अमिताभ ठाकुर की आपत्ति? = अमिताभ ठाकुर का आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने बेहद जल्दबाजी दिखाई थी। मामले के दर्ज होने के महज 10 दिनों के भीतर ही पुलिस ने उनकी न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) मांग ली थी। लेकिन आज इस घटना को 6 महीने से अधिक का समय बीत चुका है, और पुलिस अब तक किसी भी कानूनी निष्कर्ष या चार्जशीट (आरोप पत्र) तक नहीं पहुंच पाई है।
अमिताभ ठाकुर ने अपनी अर्जी में एक बेहद तार्किक और तीखा सवाल उठाया है:
“क्या कोई जांच एजेंसी, एफआईआर दर्ज होने के 10 दिनों के भीतर किसी आरोपी की न्यायिक हिरासत मांगने के बाद, बिना किसी ठोस वजह या रुकावट के, छह महीने से अधिक समय तक जांच को लटका कर रख सकती है? जब शुरुआती दिनों में पुलिस के पास हिरासत मांगने के लिए पर्याप्त सामग्री थी, तो अब जांच पूरी करने में इतनी देरी क्यों हो रही है?”
उनका कहना है कि गिरफ्तारी और मामला दर्ज होने के 8 महीने बाद भी सक्षम न्यायालय के सामने कोई उचित पुलिस रिपोर्ट पेश नहीं की गई है, जो सीधे तौर पर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है। इसी वजह से उन्होंने अमिताभ ठाकुर वाराणसी कोर्ट प्रगति रिपोर्ट के जरिए इंसाफ और पारदर्शिता की गुहार लगाई है।
जानिए क्यों दर्ज हुआ था पूर्व IPS पर मुकदमा? = इस पूरे विवाद की शुरुआत पिछले साल 9 दिसंबर को हुई थी। वाराणसी के बड़ी पियरी इलाके के रहने वाले हिंदू युवा वाहिनी के नेता और वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) के मानद सदस्य अंबरीश सिंह भोला ने चौक थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि : 30 नवंबर को अमिताभ ठाकुर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया था। इस वीडियो में अंबरीश सिंह भोला पर आपराधिक मामलों में शामिल होने के झूठे आरोप लगाए गए थे। बिना किसी सबूत के, बहुचर्चित कफ सिरप मामले में उनका नाम घसीटा गया, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा। इस शिकायत के आधार पर चौक पुलिस ने अमिताभ ठाकुर, उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
देवरिया से हुई थी गिरफ्तारी, अब जमानत पर हैं बाहर = प्राथमिकी दर्ज होने के ठीक 10 दिन बाद पुलिस ने अमिताभ ठाकुर को देवरिया से गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें देवरिया जेल से वाराणसी की सेंट्रल जेल लाया गया, जहां कोर्ट में पेशी के बाद उनका न्यायिक रिमांड मंजूर हुआ। रिमांड प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस उन्हें कड़ी सुरक्षा में वापस देवरिया जेल ले गई थी। हालांकि, बाद में उन्हें इस मामले में अदालत से जमानत मिल गई थी।
अब इसी मामले में कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाते हुए पूर्व आईपीएस ने कोर्ट से पुलिसिया कार्रवाई का पूरा हिसाब मांगा है। अब सभी की निगाहें 24 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां चौक पुलिस को कोर्ट के सामने अपनी जवाबदेही तय करनी होगी।



