इस पूरे मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं, हृदयानंद यादव एवं कुलदीप गुप्ता की सूझबूझ और प्रभावी पैरवी की हर तरफ सराहना हो रही है।

वाराणसी: उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और न्यायिक राजधानी वाराणसी की एक स्थानीय अदालत से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। लालपुर-पांडेयपुर थाना क्षेत्र से जुड़े एक मामले में आखिरकार अभियुक्त हबीब अली को मिली जमानत। बुधवार, 15 जुलाई 2026 को न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करने के बाद हुई सुनवाई में कोर्ट ने आरोपी को राहत दे दी है। यह आदेश अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन), न्यायालय कोड संख्या-4, वाराणसी की अदालत द्वारा जारी किया गया है।

क्या था पूरा मामला? = यह पूरा मामला थाना लालपुर-पांडेयपुर, जनपद वाराणसी के मुकदमा अपराध संख्या 141/2023 (राज्य बनाम हबीब अली) से जुड़ा हुआ है। दर्ज धाराएं: अभियुक्त हबीब अली के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 379 (चोरी) और धारा 411 (चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। आत्मसमर्पण: लंबे समय से विचाराधीन इस मामले में 15 जुलाई 2026 को अभियुक्त हबीब अली ने कानून का सम्मान करते हुए माननीय न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण (Surrender) किया।

अदालत में वकीलों की जोरदार बहस = सुनवाई के दौरान अदालत का माहौल काफी गंभीर था। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हृदयानंद यादव एवं अधिवक्ता कुलदीप गुप्ता ने कमान संभाली। उन्होंने माननीय न्यायालय के समक्ष अभियुक्त के पक्ष में बेहद प्रभावी, सटीक और विस्तृत विधिक तर्क (Legal Arguments) प्रस्तुत किए।

बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि अभियुक्त कानून की प्रक्रिया में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार है और उस पर लगाए गए आरोपों के कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उसे राहत दी जानी चाहिए।

शर्तों के साथ अभियुक्त हबीब अली को मिली जमानत = सरकारी वकील और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद, माननीय न्यायालय ने दोनों पक्षों के कानूनी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया।

बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं (हृदयानंद यादव और कुलदीप गुप्ता) द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और ठोस कानूनी दलीलों से संतुष्ट होकर माननीय न्यायालय ने अभियुक्त के हक में फैसला सुनाया। इसके तुरंत बाद अभियुक्त हबीब अली को मिली जमानत का आदेश पारित कर दिया गया।

न्यायालय द्वारा तय की गईं शर्तें : अभियुक्त हबीब अली को ₹25,000 के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश। इसके साथ ही इतनी ही राशि की एक जमानतदार की प्रतिभूति (Security) कोर्ट में दाखिल करने के निर्देश दिए गए।

वकीलों की पैरवी की हर तरफ चर्चा = न्यायालय के इस आदेश के अनुपालन में निर्धारित कानूनी औपचारिकताएं और शर्तें पूरी करने के बाद अभियुक्त को रिहा कर दिया गया है। इस पूरे मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं, हृदयानंद यादव एवं कुलदीप गुप्ता की सूझबूझ और प्रभावी पैरवी की हर तरफ सराहना हो रही है। उनकी मजबूत कानूनी रणनीति के चलते ही अभियुक्त हबीब अली को मिली जमानत और उन्हें कोर्ट से एक बड़ी राहत नसीब हुई।

कानूनी जानकारों का मानना है कि चोरी और माल बरामदगी के मामलों में कोर्ट के समक्ष सही तरीके से अपनी बात रखना बेहद जरूरी होता है, और इस मामले में वकीलों ने बिल्कुल सटीक पैरवी की।

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