न्यायालय में अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता अमित सिंह व प्रवीण चौबे ने पक्ष रखा
वाराणसी (bmbreakingnews.com): वाराणसी की अदालत (न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश, न्यायालय संख्या-1) की न्यायाधीश संध्या श्रीवास्तव ने इंस्टाग्राम पर ऑनलाइन कपड़ों के व्यापार के नाम पर कथित धोखाधड़ी के एक मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी इश्तेयाक एन० हुसैन को जमानत दे दी है। साइबर क्राइम थाने में दर्ज इस मुकदमे में बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने 50,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और दो प्रतिभूतियों की शर्त पर यह राहत प्रदान की।
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क्या था पूरा मामला? = पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान उप-निरीक्षक संजीव कुमार कन्नौजिया को 10 IMEI नंबरों की जांच सौंपी गई थी। इनमें से एक IMEI नंबर (351824513966927) पर राष्ट्रीय समन्वय पोर्टल पर 2 ऑनलाइन शिकायतें दर्ज पाई गईं। पहली शिकायत: आईमान रसूल ने आरोप लगाया था कि चिकन के कपड़ों की खरीदारी के नाम पर उनके साथ 15,500 रुपये की ठगी हुई। दूसरी शिकायत: वैभव गुप्ता ने चिकन के कपड़े के ऑनलाइन ऑर्डर पर 20,000 रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया था।
जब पुलिस ने सर्विलांस और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के जरिए जांच को आगे बढ़ाया, तो एक मोबाइल फोन धानापुर के आसिफ खान के पास मिला। आसिफ ने बताया कि उसने यह फोन अपने पड़ोसी फैसल से लिया था और फैसल ने इसे भेलूपुर स्थित ‘मिलन एंटरप्राइजेज’ से खरीदा था। दुकान मालिक से पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह फोन मदनपुरा (वाराणसी) निवासी इश्तेयाक एन० हुसैन ने बेचा था, जिसकी दुकान और आधार की प्रति फॉर्म में संलग्न थी। इसके बाद साइबर क्राइम थाने में धारा 318(4) BNS और 66D IT Act के तहत अपराध संख्या 32/2026 दर्ज किया गया।
बचाव पक्ष की दलीलें और अदालत का रुख = अदालत में आवेदक/अभियुक्त इश्तेयाक हुसैन की ओर से अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि : कारोबारी वजह से हुई देरी: आवेदक पिछले 7-8 वर्षों से ऑनलाइन कपड़ा व्यवसाय कर रहा है। कुछ विशेष कपड़ों को तैयार करने में 6 से 7 माह का समय लगता है, जिसके कारण डिलीवरी में स्वाभाविक देरी हुई। इसे ठगी या धोखाधड़ी नहीं कहा जा सकता। पारिवारिक परिस्थितियां: अभियुक्त के पिता मुख्य कारीगर थे, जिनकी लंबी बीमारी के बाद मृत्यु हो गई। इस वजह से काम में रुकावट आई थी। निर्दोषता और साक्ष्य: पुलिस के पास कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है और न ही अभियुक्त का कोई पिछला आपराधिक इतिहास है। वह अपने परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य है और उसकी 70 वर्षीया मां बीमार रहती हैं।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया। हालांकि, कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह पाया कि आरोपित धाराओं में अधिकतम 7 वर्ष की सजा का प्रावधान है और कोई आपराधिक इतिहास भी प्रस्तुत नहीं किया गया है।
कोर्ट का आदेश और जमानत की शर्तें = अदालत ने मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए और बिना गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए, आरोपी इश्तेयाक एन० हुसैन की प्रथम जमानत याचिका स्वीकार कर ली। न्यायालय ने निम्नलिखित शर्तों पर जमानत दी : ₹50,000 का व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि के दो जमानती प्रस्तुत करना। अभियुक्त मुकदमे के विचारण में पूर्ण सहयोग करेगा और बेवजह स्थगन (Adjournment) नहीं मांगेगा। अभियुक्त मामले से जुड़े किसी भी गवाह को डराएगा-धमकाएगा या प्रभावित नहीं करेगा।
BM Breaking News टेक-अवे: वाराणसी साइबर क्राइम न्यूज के इस मामले से स्पष्ट होता है कि ऑनलाइन व्यापार करने वाले कारोबारियों को ग्राहकों के ऑर्डर, रसीद और डिलीवरी टाइमलाइन का स्पष्ट रिकॉर्ड रखना चाहिए, ताकि किसी भी कानूनी विवाद से बचा जा सके।



