न्यायालय में वादी मुकदमा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता स्वतंत्र जायसवाल व राजेश कुमार ने मजबूती से पक्ष रखा। ज्ञात हो कि बीते 26/8/26 को इसी आरोपी के यहां मंडुआडीह पुलिस द्वारा मुनादी और भगोड़ा घोषित किया गया था।
वाराणसी के थाना मंडुवाडीह क्षेत्र अंतर्गत शिवदासपुर निवासी आकाश सिंह को न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश (कोर्ट सं.-07/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट) से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने आरोपी आकाश सिंह द्वारा प्रस्तुत अग्रिम जमानत प्रार्थना-पत्र संख्या 2851/2026 को गंभीर आरोपों और विवेचना में सहयोग न करने के आधार पर निरस्त कर दिया है।
क्या है पूरा मामला? = मामले की शुरुआत 4 फरवरी 2026 से हुई, जब वादी मुकदमा हर्ष जायसवाल की गाड़ी (संख्या- MHO2CW6089) को उसका दोस्त आकाश सिंह एक शादी समारोह में ले जाने के नाम पर मांगकर ले गया था। अगले दिन तड़के आकाश ने कार दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना दी। जब वादी मौके पर पहुंचा तो कार महेशपुर सादात मार्ग पर बुरी तरह पलटी हुई और क्षतिग्रस्त मिली। वादी का आरोप है कि गाड़ी की मरम्मत का एस्टीमेट करीब 12 लाख रुपये आया था। आकाश सिंह ने पहले तो यह रकम 10 दिन में देने का वादा किया, लेकिन बाद में हीला-हवाली करने लगा। जब वादी ने अपने पैसे मांगे, तो आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। न्यायालय में वादी मुकदमा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता स्वतंत्र जायसवाल व राजेश कुमार ने मजबूती से पक्ष रखा।

पुलिस शिकायत के बाद मारपीट और सोने की चेन लूटने का आरोप = पुलिस आयुक्त वाराणसी को प्रार्थना पत्र दिए जाने के बाद, जब 14 जून 2026 को वादी अपने एक मित्र के साथ आरोपी आकाश सिंह से मिलने इंडस्ट्रियल एरिया गया, तो वहां आरोपी ने अपने 3-4 अज्ञात साथियों के साथ मिलकर वादी के साथ मारपीट की। आरोप है कि इस दौरान आरोपी ने वादी के गले से 8 ग्राम की सोने की सिकड़ी (चेन) भी छीन ली और दोबारा शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद मंडुवाडीह थाने में बीएनएस (BNS) की धारा 115(2), 309(4), 316(2), 324(5), 352 और 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
आरोपी पक्ष के वकील की दलीलें = सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि पूरा मामला मनगढ़ंत और झूठा है। कार का बीमा (ICICI Lombard) मौजूद था, फिर भी वादी गलत तरीके से धन उगाही का दबाव बना रहा था। आरोपी ने अपने दोस्तों के खाते से 3 लाख रुपये भी भेजे थे। वकील ने यह भी कहा कि दुर्घटना में आपराधिक षड्यंत्र का मामला नहीं बनता और FIR 24 दिन के विलंब से दर्ज कराई गई है।
अदालत ने क्यों खारिज की अग्रिम जमानत? = न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के तर्कों और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं को आधार बनाया : धारा 84 BNSS की कार्रवाई: विचारण न्यायालय द्वारा आरोपी के खिलाफ धारा 84 (BNSS) के तहत उद्घोषणा (भगोड़ा घोषित करने) की कार्रवाई का आदेश दिया जा चुका है, जिससे स्पष्ट है कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। लूट और रिकवरी: मामले में अन्य अज्ञात व्यक्तियों के साथ मिलकर लूट की घटना को अंजाम देने का आरोप है और लूटी गई सोने की चेन की रिकवरी अभी तक नहीं हो पाई है। हाईकोर्ट से राहत नहीं: आरोपी ने हाईकोर्ट में एफआईआर निरस्त करने की याचिका (रिफ्रेश क्रिमिनल रिट याचिका 17480/2026) दाखिल की थी, लेकिन वहां से भी कोई स्थगन आदेश प्राप्त नहीं हुआ था।
सर्वोच्च न्यायालय की विधि व्यवस्था जय प्रकाश सिंह बनाम बिहार राज्य का उल्लेख करते हुए अदालत ने माना कि अग्रिम जमानत केवल असाधारण परिस्थितियों में दी जा सकती है। प्रकरण के तथ्यों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने आकाश सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी निरस्त कर दी।


