कोर्ट में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव और नरेश यादव ने प्रभावी पैरवी की।
वाराणसी (bmbreakingnews.com): वाराणसी के मिर्जामुराद थाना क्षेत्र अंतर्गत चारदीवारी निर्माण को लेकर हुए विवाद और घर में घुसकर जानलेवा हमला करने के मामले में अदालत से बड़ा फैसला आया है। अपर जिला जज (चतुर्थ) सर्वजीत कुमार सिंह की अदालत ने मामले के आरोपी हरिओम सिंह (निवासी ठठरा, मिर्जामुराद) को राहत देते हुए जमानत मंजूर कर ली है।
यदि आप लीगल और क्राइम अपडेट्स के लिए वाराणसी कोर्ट न्यूज़ पर नजर रखते हैं, तो आपको बता दें कि अदालत ने आरोपी हरिओम सिंह को 50-50 हजार रुपये के दो निजी मुचलके और बंधपत्र प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव और नरेश यादव ने प्रभावी पैरवी की।

क्या था पूरा विवाद और पुलिस में दर्ज शिकायत? = अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला ठठरा गांव का है। पीड़िता रीता सिंह ने मिर्जामुराद थाने में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए बताया था कि उसकी बेटी की शादी नवंबर महीने में तय है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह अपने हिस्से की जमीन बेचना चाहती थी।
इसी सिलसिले में 7 जुलाई 2026 को दोपहर लगभग 2 बजे वह अपनी जमीन पर चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) घिरवाने गई थी। आरोप है कि उसी दौरान पड़ोसी उमेश कुमार सिंह, उनका बेटा शिवम सिंह और हरिओम सिंह लाठी-डंडे और अवैध असलहे लेकर हमला करने पहुंचे। पीड़िता के अनुसार, जब वह डरकर अपने घर में भागी, तो हमलावर भी घर के अंदर घुस आए और तोड़फोड़ करने लगे।
हिंसक हमले में कई लोग हुए थे घायल = शिकायत में आगे बताया गया कि जब पीड़िता का देवर प्रदीप सिंह, देवर का साला विनय कुमार और बेटा सत्यम सिंह बीच-बचाव करने आए, तो आरोपियों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। इस हिंसक हमले में विनय कुमार और प्रदीप सिंह के सिर में गंभीर चोटें आईं और काफी खून बहने लगा, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पीड़िता का आरोप था कि घटना के बाद भी आरोपी शिवम सिंह और हरिओम सिंह फोन पर गालियां देते थे और जान से मारने की धमकियां दे रहे थे। इस मामले में वाराणसी कोर्ट न्यूज़ और पुलिस कार्रवाई के तहत मिर्जामुराद थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी हरिओम सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
कोर्ट में बचाव पक्ष के तर्क और जमानत का आदेश = अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने आरोपी के पक्ष में दलीलें रखीं और निष्पक्ष जांच व परिस्थितियों का हवाला दिया। दोनों पक्षों की बहस और पत्रावलियों के अवलोकन के बाद अपर जिला जज (चतुर्थ) की अदालत ने आरोपी हरिओम सिंह की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।



