वाराणसी / लखनऊ (BM Breaking News)। आईएएस दिव्या मित्तल का इस्तीफा इस वक्त उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ऐसी प्रशासनिक अधिकारी, जिन्होंने अपनी कार्यशैली, ईमानदारी और जनसेवा के जुनून से लाखों दिलों में जगह बनाई, उनका इस तरह अचानक सिविल सेवा को अलविदा कह देना हर किसी को हैरान और भावुक कर रहा है। आईएएस दिव्या मित्तल का इस्तीफा सुनकर उनके प्रशंसकों और आम जनता को बड़ा अफसोस हो रहा है। वह जितनी शानदार महिला हैं, उतनी ही एक कुशल, संवेदनशील और सख्त प्रशासनिक अधिकारी भी रही हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर उन्होंने रिजाइन क्यों दिया? आईएएस दिव्या मित्तल का इस्तीफा सामने आने के बाद यूपी की ब्यूरोक्रेसी को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर एक के बाद एक मेधावी आईएएस और आईपीएस अफसर सरकारी नौकरी क्यों छोड़ रहे हैं?

आईआईटी और आईआईएम से लेकर प्रशासनिक सेवा तक का सफर = दिव्या मित्तल कोई साधारण अधिकारी नहीं थीं। उन्होंने देश के सर्वोच्च संस्थानों—आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) से बी.टेक और आईआईएम बैंगलोर (IIM Bangalore) से प्रबंधन की पढ़ाई की थी। इसके बाद उन्होंने लंदन में एक बेहद आकर्षक और उच्च वेतन वाली नौकरी भी की। लेकिन मातृभूमि की सेवा का जज्बा उन्हें भारत वापस खींच लाया। उन्होंने कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी परीक्षा पास की और आईएएस अफसर बनीं। अपनी 13 साल की सेवा के दौरान उन्होंने देवरिया और मीरजापुर जैसे जिलों में ऐतिहासिक कार्य किए। विशेषकर मीरजापुर के लहुरिया दह गांव में आजादी के दशकों बाद पहली बार पीने का पानी पहुंचाना उनकी कार्यशैली का जीवंत और ऐतिहासिक उदाहरण है।
सोशल मीडिया पर लिखा भावुक संदेश: “मातृभूमि का कर्ज़ चुकाना था” = आईएएस दिव्या मित्तल का इस्तीफा देने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बेहद मार्मिक और विचारोत्तेजक पोस्ट साझा की है, जो उनके देशप्रेम और प्रशासनिक दर्शन को बयां करती है। उनके इस संदेश ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं।
आईएएस दिव्या मित्तल की पूरी पोस्ट (शब्दशः):
“आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है। साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था….. दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था…. अपने देश में न होना खलता था….. मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर…. वो कर्ज़ चुकाना था….. चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों…. सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला…..”
“बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा…. देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है…. मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है….. और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है…. सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था।”
“इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला, उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है….. मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया.. लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए….. उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी….. और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी…..”
“इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी….. और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे….. आज आभार से आँखें नम हैं. बस एक दृश्य इनमें बसा है. लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा….. और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।”
आईएएस दिव्या मित्तल का इस्तीफा केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था के पुनर्मूल्यांकन की मांग करता है। पिछले कुछ समय में जिस तरह से योग्य, पढ़े-लिखे और जनहित में काम करने वाले अधिकारी अपनी नौकरियां छोड़ रहे हैं, उससे यह सवाल गहराता जा रहा है कि क्या नौकरशाही में बढ़ते राजनीतिक दबाव, लगातार तबादलों और प्रशासनिक सीमाओं के कारण ऐसे अधिकारी घुटन महसूस कर रहे हैं?
जनता और उनके प्रशंसक यह आसानी से मानने को तैयार नहीं हैं कि देश को बेहतर दिशा देने वाली अफसर अचानक अपनी 13 साल की तपस्या को विराम दे दे। आईएएस दिव्या मित्तल का इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि एक सच्चा लोकसेवक पद से बंधा नहीं होता, बल्कि उसका उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना होता है। हालांकि, उनका प्रशासनिक सेवा से जाना यूपी कैडर और भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है।


