वादी द्वारा अपने अधिवक्ताओं अनुज यादव और नरेश यादव के माध्यम से अदालत में प्रार्थना पत्र दिया गया।

वाराणसी। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में संपत्ति हड़पने और धोखाधड़ी कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्कूल का लाइसेंस हासिल करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। पिता की मौत के बाद उनकी कीमती संपत्ति पर फर्जी लीज डीड तैयार कराने और उसी कूटचरित (फर्जी) दस्तावेज के जरिए बनारस पब्लिक स्कूल का संचालन व लाइसेंस प्राप्त करने के आरोपी परिवार के सदस्यों पर अब कानून का शिकंजा कस गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) मनीष कुमार की अदालत ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए वाराणसी की कैंट थाना पुलिस को एफआईआर (FIR) दर्ज कर मामले की निष्पक्ष विवेचना (जांच) करने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला? (प्रकरण का विवरण) = मामले की शुरुआत कश्मीरीगंज, भेलूपुर निवासी वादी शैलेन्द्र कुमार वर्मा द्वारा अपने अधिवक्ताओं अनुज यादव और नरेश यादव के माध्यम से अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र से हुई। वादी ने बीएनएनएस (BNNS) की धारा 173(4) के तहत अदालत में न्याय की गुहार लगाई थी। शैलेन्द्र कुमार वर्मा का आरोप है कि उनके स्वर्गीय पिता जित्तूराम वर्मा के स्वामित्व में दो भवन—क्रमशः मकान नंबर बी. 24/70ए और मकान नंबर बी. 24/70 दर्ज थे। इसके अलावा उनकी स्वर्गीय माता राजमनी वर्मा के नाम पर भवन संख्या बी. 24/64 स्थित है।

माता-पिता के निधन के बाद इन तीनों मकानों के वैध वारिस और उत्तराधिकारी के रूप में केवल दो लोग ही थे—प्रार्थी शैलेन्द्र कुमार वर्मा और उनकी बहन सुषमा रतन। वर्ष 2023 में प्रार्थी की बहन सुषमा रतन की सहमति और अनापत्ति (NOC) के आधार पर ही नगर निगम/राजस्व अभिलेखों में तीनों संपत्तियों पर शैलेन्द्र कुमार वर्मा का तनहा (अकेला) नाम बतौर मालिक दर्ज हुआ।

धोखाधड़ी और फर्जी लीज डीड का खेल = वादी का आरोप है कि उनकी बहन सुषमा रतन ने छल-कपट और संपत्ति हड़पने की बदनियती से 03 दिसंबर 2022 को उपनिबंधक सदर तृतीय (वाराणसी) के कार्यालय में एक फर्जी लीज डीड (Lease Deed) पंजीकृत करा ली। इस लीज डीड में सुषमा रतन ने खुद को मकान संख्या बी. 24/70ए का एकमात्र मालिक बताया और स्वयं को ‘बनारस पब्लिक स्कूल’ की प्रबंधक घोषित कर दिया।

फर्जीवाड़े की मुख्य कड़ियां = वर्ष 2000 की बैक-डेटिंग का खेल: पंजीकृत कराई गई लीज डीड के पृष्ठ संख्या 3 की शर्त नंबर 1 में लिखा गया कि यह लीज 18 जून 2000 से 30 वर्षों के लिए मान्य है, जबकि यह लीज डीड 03 दिसंबर 2022 को लिखवाई गई थी। मालिकाना हक का गलत दावा: वर्ष 2000 से लेकर 2023 तक यह मकान वादी के पिता स्व. जित्तूराम वर्मा के नाम पर ही दर्ज था। वर्ष 2023 में बहन की सहमति से प्रार्थी के नाम दर्ज हुआ। ऐसे में वर्ष 2022 में सुषमा रतन द्वारा स्वयं को मकान की स्वामिनी बताना पूरी तरह झूठा और कूटचरित था।

फर्जी लीज डीड से लिया स्कूल का लाइसेंस = शैलेन्द्र कुमार वर्मा का कहना है कि आरोपी बहन ने सिर्फ मकान हड़पने की नीयत ही नहीं रखी, बल्कि इसी फर्जी और जाली लीज डीड को संबंधित शिक्षा विभाग में जमा करके ‘बनारस पब्लिक स्कूल’ के संचालन का लाइसेंस भी हासिल कर लिया, जो कि एक गंभीर आपराधिक कृत्य है।

कोर्ट का फैसला: कैंट पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का आदेश = अदालत में वादी शैलेन्द्र कुमार वर्मा के वकीलों की दलीलों और पेश किए गए साक्ष्यों को सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत ने मामले की गंभीरता को समझा। कोर्ट ने वाराणसी के कैंट थाना प्रभारी को निर्देश दिया है कि मामले में नामजद आरोपियों—सुषमा रतन, नील रतन और नंदा रतन के खिलाफ प्रासंगिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर तत्परता से कानूनी विवेचना शुरू की जाए।

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