वाराणसी। देश के लोकतांत्रिक ढांचे और नागरिकों के मताधिकार को लेकर एक बार फिर वाराणसी से आवाज बुलंद हुई है। निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाते हुए साझा संस्कृति मंच ने मोर्चा खोल दिया है। मंच ने पात्र नागरिकों के नाम बिना पूर्व सूचना के मतदाता सूची से हटाए जाने का कड़ा विरोध करते हुए देश की महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक 5 सूत्री मांग-पत्र जिलाधिकारी (वाराणसी) के माध्यम से प्रस्तुत किया है।

मंच का साफ तौर पर कहना है कि भारत के हर पात्र नागरिक के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज होना उसके लोकतांत्रिक अधिकारों की पहली सीढ़ी है। ऐसे में निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे वाराणसी मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के दौरान पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

क्या है पूरा मामला? क्यों उठ रहे हैं सवाल? = साझा संस्कृति मंच के प्रतिनिधियों का कहना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव ही भारतीय लोकतंत्र की असली पहचान हैं। लेकिन मौजूदा समय में जिस तरह से वाराणसी मतदाता सूची पुनरीक्षण की आड़ में पात्र मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं, वह चिंताजनक है। मंच के अनुसार, किसी भी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाने से पहले उसे लिखित सूचना देना और अपना पक्ष रखने का मौका देना लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी शर्त है। इस प्रक्रिया में हो रही अनियमितताएं सीधे तौर पर नागरिकों के अधिकारों पर हमला हैं।

साझा संस्कृति मंच की 5 प्रमुख मांगें = राष्ट्रपति महोदया से हस्तक्षेप की अपील करते हुए साझा संस्कृति मंच ने निम्नलिखित पाँच मुख्य मांगें रखी हैं : मुख्य निर्वाचन आयुक्त का इस्तीफा: निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त का इस्तीफा लिया जाए। SIR प्रक्रिया तुरंत रद्द हो: चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द कर इसकी निष्पक्षता, पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं पर पड़े दुष्प्रभावों की गहन समीक्षा की जाए। फॉर्म-6 के नियमों में सुधार: Form-6 में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया में किए गए कथित गैर-कानूनी बदलावों को वापस लिया जाए और नाम जोड़ने की प्रक्रिया को सहज व पारदर्शी बनाया जाए। काटे गए नामों के आंकड़े सार्वजनिक हों: वाराणसी जनपद में SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए कुल नामों की संख्या को विधानसभा क्षेत्रवार (Constituency-wise) विस्तृत रूप से सार्वजनिक किया जाए। प्रभावित नागरिकों को लिखित सूचना: जिन नागरिकों का नाम मतदाता सूची से काटा गया है, उन्हें लिखित कारण, निर्णय का विवरण, अपील की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और नाम पुन: जुड़वाने की समय-सीमा के साथ व्यक्तिगत नोटिस भेजा जाए।

निष्पक्ष निर्वाचन ही लोकतंत्र की आधारशिला = साझा संस्कृति मंच के प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से संबंधित किसी भी प्रशासनिक कदम में नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना सबसे पहला कर्तव्य है। यदि आम जनता का निर्वाचन आयोग और चुनाव प्रक्रिया से विश्वास उठ जाएगा, तो लोकतंत्र कमजोर होगा। इसीलिए महामहिम राष्ट्रपति से गुहार लगाई गई है कि वे इस मामले में त्वरित संज्ञान लें। राष्ट्रपति को संबोधित इस मांग-पत्र को सौंपने के दौरान शहर के कई प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता और नागरिक मौजूद रहे।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से धनञ्जय त्रिपाठी, जागृति राही, अनूप श्रमिक, सतीश सिंह, रामजन्म यादव, अधिवक्ता मुन्ना राय, रवि शेखर, एकता शेखर, नीति, मुकेश उपाध्याय, सानिया, मनीष, बबलू, अमन, जावेद माजिद, कल्याण, अहमद, किरन सिंह, गुड्डी देवी, अनामिका, अखिलेश यादव, किरण, वंदना, दीपांशी, पिंकला, शकुंतला, अंजली और नंदा शास्त्री समेत भारी संख्या में लोग शामिल रहे।

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