वाराणसी (BM Breaking News): धर्म और आस्था की नगरी काशी में श्री शीतला माता एवं सती माता मंदिर, बड़ी बाजार, वाराणसी का मामला इन दिनों प्रशासनिक गलियारों और श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार और निर्माण कार्य पर सदर एसडीएम द्वारा लगाई गई रोक के बाद से क्षेत्रीय जनता, सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं में भारी असंतोष व्याप्त है। आइए समझते हैं कि श्री शीतला माता एवं सती माता मंदिर, बड़ी बाजार, वाराणसी की भूमि का वास्तविक राजस्व इतिहास क्या है और किस आधार पर प्रशासनिक आदेश पर सवाल उठ रहे हैं।

क्या कहते हैं भूमि के राजस्व अभिलेख? = राजस्व रिकॉर्ड्स के अनुसार, श्री शीतला माता एवं सती माता मंदिर, बड़ी बाजार, वाराणसी से संबंधित गाटा संख्या 478, जिसका रकबा 1 बिस्वा 5 धूर है, का इतिहास काफी स्पष्ट रहा है : पुराने अभिलेखों में मालिकाना हक: पुराने अभिलेखों में इस भूमि का मालिकाना हक क्रमशः महाराजा विभूति नारायण सिंह, तत्पश्चात श्री महाराजा साहब बहादुर कारस्तकार तथा शिवनंदन नवयत आबादी दर्ज रहा है (जो वर्ष 1983 तक दर्ज बताया जाता है)। वर्तमान स्थिति: वर्तमान अभिलेखों में शरनलाल पुत्र राम शरनलाल का नाम दर्ज है। यह पूरी जानकारी सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। प्राचीनकाल से ही यह पवित्र स्थल पूजा-पाठ, भंडारा, नवरात्रि और विभिन्न सामाजिक-धार्मिक कार्यक्रमों का प्रमुख केंद्र रहा है।

निर्माण कार्य और एसडीएम सदर के आदेश पर क्यों उठ रहे सवाल? = स्थानीय लोगों और समिति के अनुसार, श्री शीतला माता एवं सती माता मंदिर, बड़ी बाजार, वाराणसी के परिसर में जीर्णोद्धार का कार्य भाग संख्या 20/1 पर शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था। जबकि विवाद से जुड़ा मामला भाग संख्या 20/2 से संबंधित है, जो न्यायालय में विचाराधीन है। उपलब्ध नक्शों, सीमांकन और अभिलेखों से यह साफ है कि मंदिर निर्माण किसी भी विवादित हिस्से पर नहीं, बल्कि पूर्णतः निर्विवादित भाग संख्या 20/1 पर किया जा रहा था। इसके बावजूद तथ्यों के विपरीत आदेश: सदर एसडीएम द्वारा धारा 164/165 के तहत जारी रोक संबंधी आदेश को अभिलेखों और विधिक प्रक्रिया के विरुद्ध बताया जा रहा है। जांच का अभाव: आरोप है कि न्यायालय में लंबित प्रकरण की वास्तविक स्थिति की गहन जांच किए बिना और निष्पक्ष स्थल निरीक्षण के बिना ही यह आदेश पारित किया गया है।

लेखपाल और बाहरी हस्तक्षेप पर गंभीर आरोप = इस पूरे प्रकरण में क्षेत्रीय निवासियों ने लेखपाल की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं लेखपाल की संदिग्ध भूमिका: आरोप लगाया गया है कि संबंधित लेखपाल ने दबाव और पक्षपातपूर्ण ढंग से आख्या (रिपोर्ट) तैयार की, जिससे उच्चाधिकारियों को भ्रामक जानकारी दी गई। स्थानीय लोगों ने लेखपाल के खिलाफ विभागीय और कानूनी जांच की मांग की है। इम्तियाज अहमद नामक व्यक्ति का हस्तक्षेप: मामले में इम्तियाज अहमद नामक व्यक्ति पर अनधिकृत हस्तक्षेप का आरोप है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह धनबल और प्रभाव के दम पर अधिकारियों पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है, जिससे क्षेत्र के सामाजिक सौहार्द और शांति व्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।

श्री शीतला माता एवं सती माता मंदिर, बड़ी बाजार, वाराणसी के संरक्षण और आस्था की रक्षा के लिए प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की गई हैं : धारा 164/165 के तहत पारित निर्माण रोक आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए। मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार और निर्माण कार्य को अविलंब पुनः प्रारंभ कराया जाए। संबंधित लेखपाल द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट और नक्शों की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाए। प्रकरण में अनुचित दबाव बनाने वाले इम्तियाज अहमद की भूमिका की गहन जांच कर विधिक कार्रवाई की जाए।

मंदिर समिति और स्थानीय नागरिकों ने इस कठिन समय में सहयोग देने वाले सभी जनप्रतिनिधियों, काशी के सांसद एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्रियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, धर्माचार्यों और सामाजिक संगठनों का हृदय से धन्यवाद व्यक्त किया है। श्रद्धालुओं को पूर्ण विश्वास है कि श्री शीतला माता एवं सती माता मंदिर, बड़ी बाजार, वाराणसी के निर्माण का मार्ग जल्द ही प्रशस्त होगा और काशी की सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपरा तथा आपसी सौहार्द की विजय होगी।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *