वाराणसी: काशी की धर्मिक और सांस्कृतिक धरा पर इन दिनों रामलीला की अलौकिक छटा छाई हुई है। इसी क्रम में श्री आदि लाट भैरव रामलीला समिति वरुणा संगम काशी की ओर से दिनांक 07 अक्टूबर 2026 को संध्या ठीक 7 बजे राम वनगमन के अत्यंत मार्मिक और भावुक प्रसंग का मंचन किया गया। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम, माता जानकी और भैया लक्ष्मण के चौदह वर्षों के वनवास के प्रसंग को देखकर वहां मौजूद सभी लीला प्रेमी भावविभोर हो उठे।

भव्य शोभायात्रा और काशीवासियों का स्वागत = यह पावन यात्रा विशेश्वरगंज से शुरू होकर धनेशरा तालाब और पीलीकोठी वनगमन मार्ग तक निकाली गई। राम वनगमन के इस सुंदर मार्ग पर काशीवासियों ने जगह-जगह रुककर प्रभु श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण की विधिवत भोग आरती और पूजन किया। भक्तों का उत्साह और श्रद्धा देखते ही बन रही थी, पूरा मार्ग “जय श्री राम” के जयकारों से गूंज उठा।

परंपरा और पूजन का विशेष आयोजन = रामलीला समिति के व्यास दयाशंकर त्रिपाठी (दया गुरु) के मार्गदर्शन में यह भव्य यात्रा आगे बढ़ी। हनुमान फाटक निवासी शम्भू नाथ पाण्डेय के आवास पर भगवान श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण का अत्यंत भव्य स्वागत, पूजन और अर्चन किया गया।

इस दौरान शम्भू नाथ पाण्डेय (नेपाली), गोपाल पाण्डेय, शंकर नाथ पाण्डेय, कैलाश पाण्डेय, अतुल पाण्डेय और अंकुर पाण्डेय समेत कई गणमान्य लोगों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रभु श्रीराम और माता जानकी से आशीर्वाद प्राप्त किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आत्मीय परंपरा सालो-साल से चली आ रही है, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाया जा रहा है।

राम वनगमन के इस जीवंत मंचन ने एक बार फिर काशी की प्राचीन संस्कृति और सनातन परंपरा की गहरी छाप छोड़ी, जिसमें हर भक्त प्रभु की भक्ति में सराबोर नजर आया।

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