अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक शंकर तिवारी व राजीव सिंह ने पक्ष रखा

वाराणसी। जनपद के न्यायालय सत्र न्यायाधीश के द्वारा थाना बड़ागांव में दर्ज मुअसं. 392/2025 धारा-109 (1) बी०एन०एस० व 3/25/27 आयुध अधिनियम के अभियुक्त दीपक सिंह पुत्र नरेन्द्र प्रताप सिंह निवासी ग्राम मेहदौरी, मिर्जापुर चौहारी, थाना रानीगंज, जनपद प्रतापगढ़, को 50 हजार रूपये के व्यक्तिगत बंध पत्र एवं समान धनराशि की दो जमानतें देने पर रिहा करने का आदेश दे दिया गया है। वहीं अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक शंकर तिवारी व राजीव सिंह ने पक्ष रखा।

वहीं अदालत में बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि प्रार्थी/अभियुक्त दीपक सिंह की तरफ से उपरोक्त मामले में जमानत हेतु यह जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है। अभियुक्त न्यायिक अभिरक्षा में हैं। प्रार्थी/अभियुक्त की ओर से कथन किया गया है कि यह उसका प्रथम जमानत प्रार्थना पत्र है। इसके अलावा अन्य कोई जमानत प्रार्थना पत्र किसी न्यायालय में विचाराधीन नहीं है। जमानत प्रार्थना पत्र के साथ शपथ-पत्र दाखिल किया गया है।

वहीं अभियोजन कथानक इस प्रकार है कि दिनांक 11-09-2025 को प्रभारी निरीक्षक अतुल कुमार सिंह मय हमराह व सरकारी जीप चेकिंग कर रहे थे कि सूचना पर रखौना रिंग रोड की तरफ से आने वाले वाहनों को रोक रोक कर चेक किया जाने लगा कि कुछ देर बाद एक सफेद चारपहिया वाहन तेज गति से आता दिखाई दिया। जिसे टार्च की रोशनी से रुकने का इशारा किया गया तो उक्त वाहन का चालक अपने वाहन की गति को और बढ़ाकर भागा जिनका पीछा किया गया कि कुछ ही दूर आगे चलकर निर्माणाधीन पेट्रोल पम्प के सामने बालू के ढेर में ले जाकर गाड़ी फंसा दिया।

वाहन बंद हो गया जिसके बाद उक्त वाहन से चालक व एक अन्य व्यक्ति उतर कर निर्माणाधीन पेट्रोल पम्प की ओर भागने लगे जिन्हे चतावनी देते हुए आत्मसमर्पण करने हेतु कहा गया तो उक्त दोनो व्यक्तियों द्वारा अपने अपने हाथ में लिए असलहे से पुलिस बल पर लक्ष्य साधकर जान से मारने की नियत से फायर कर दिये। जिनमें पुलिसकर्मी बच गये और आत्म सुरक्षार्थ न्यूनतम बल प्रयोग के सिद्धान्त का पालन करते हुये प्रभारी निरीक्षक द्वारा अपनी सरकारी पिस्टल 09 एमएम से दो चक्र फायर किया गया व उ०नि० अभिषेक कुमार राय द्वारा अपनी सरकारी पिस्टल 09 एमएम द्वारा एक चक्र फायर किया गया। थोड़ी देर बाद बदमाशों के गिरकर कराहने की आवाज सुनकर पुलिस वाले पास जाकर देखे तो दोनो बदमाश घायल अवस्था में निर्माणाधीन पेट्रोल पम्प के परिसर में गिरे पड़े हैं व उन दोनों बदमाशों का असलहा भी उनके दाहिने हाथ के पास पड़ा है तथा दोनो बदमाश कराह रहे हैं।

दोनों बदमाशों का नाम पता बारी बारी पूछा गया तो दाहिने पैर में चोट लगे बदमाश ने अपना नाम गुफरान बताया जिसकी जामा तलाशी दाहिने जेब से एक अदद रुपया व एक अदद जिन्दा ली गयी तो बदमाश गुफरान उपरोक्त के पहने हुए लोवर के मोबाईल विवो तथा पहने हुए लोवर के बांये जेब से कुल 3000 कारतूस 315 बोर बरामद हुआ। तत्पश्चात बांये पैर में चोट लगे व्यक्ति में अपना नाम दीपक सिंह बताया जिसकी जामा तलाशी ली गयी तो बदमाश दीपक सिंह उपरोक्त के पहने हुए पैट के बांये जेब से एक अदद मोबाईल रियलमी एण्ड्रायड तथा पहने हुए पैण्ट के दाहिने जेब से कुल 2000 रुपये व एक अदद जिन्दा कारतूस 315 बोर बरामद हुआ। वाहन उपरोक्त में पिछली सीट में एक व्यक्ति दुबका हुआ पाया गया जिसको वाहन से बाहर निकाल कर नाम पता पूछा गया तो अपना नाम तौकीर खान बताया, जामा तलाशी ली गयी तो पहने हुए लोवर के दाहीने जेब से से एक अदद ओप्पो एण्ड्रायड फोन बरामद हुआ तथा पहने हुए लोवर के बांये जेब से कुल 1000 रुपया बरामद हुआ।

पकड़े गये बदमाश गुफरान से भागने व पुलिस पर फायर कायर करने के सम्बन्ध में कड़ाई से पूछताछ किया गया तो बताया कि वह और उसके साथी दीपक सिंह, साहिल उर्फ जानी और सलमान तथा अन्य कई दोस्त है। वे लोग मिलकर अपने साथियों के साथ अलग अलग जनपदों में ट्रक लूटते है तथा ड्राइवर के पास मौजूद मोबाईल व पैसे छीन लेते हैं, उसके बाद लूटे हुए सामानों को बेच देते हैं बेचने से प्राप्त रुपयों को घटना में शामिल दोस्तो में बराबर बराबर बांट लेते हैं। वहीं प्रार्थी/अभियुक्त की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया है कि उसे झूठा फंसाया गया है। उसके द्वारा कोई अपराध कारित नहीं किया गया है।

वास्तविकता यह है कि दिनांक 09-09-2025 को प्रतापगढ़ से वापस घर आते समय लगभग 1 बजे दिन में अज्ञात पुलिस वालों के द्वारा उसको पकड़कर थाने कुछ पूछताछ करने के बहाने से ले जाया गया था तथा कथित घटना के दिनांक व समय के पूर्व से ही उसके आँख में पट्टी बांधकर अकेले अज्ञात वाहन से घुमाया जाता रहा। कथित घटना दिनांक को पुलिस द्वारा उसे अज्ञात जगह ले जाकर फर्जी व मनगढ़ंत कहानी बनाते हुए अन्य लोगों को साथ में होने की बात कहकर फर्जी पुलिस मुठभेड़ दिखाते हुए उसके पैर में गोली मारकर फर्जी तरीके से पुलिस द्वारा अपने पास से प्रार्थी/अभियुक्त के हाथ में तमंचा रखकर प्रार्थी/अभियुक्त द्वारा फायर करने कि झूठी कहानी बनाकर उक्त मुकदमा दर्ज कराया गया है। उसके पास से बरामद मोबाईल किसी अपराध से सम्बन्धित नहीं कहा गया है तथा बरामद 2000/- रूपये उसके स्वयं के हैं।

प्रकरण में किसी पुलिसकर्मी को कोई चोट लगना नहीं बताया गया है। प्रार्थी/अभियुक्त निर्दोष है। अतः उसे जमानत पर रिहा किया जाय। वहीं न्यायालय के द्वारा उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण के तर्कों को सुना गया तथा पत्रावली का परिशीलन करने के बाद प्रार्थी/अभियुक्त दीपक सिंह की ओर से उपरोक्त मामले में प्रस्तुत जमानत प्रार्थनापत्र तदनुसार स्वीकार किया जाता है। प्रार्थी/अभियुक्त द्वारा मुबलिग 50.000/- (पचास हजार रूपये) का व्यक्तिगत बंधपत्र एवं समान धनराशि की दो जमानतें सम्बन्धित न्यायालय की संतुष्टि पर दाखिल किये जाने एवं निम्न शर्तों के अधीन अण्डरटेकिंग दाखिल करने पर उसको जमानत पर रिहा किया जाता है।

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