नाबालिग बच्चों की अश्लील फोटो, वीडियो बनाकर पैसे मांगने का था आरोप
अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, सौरभ गुप्ता, चंद्रेश यादव व संदीप यादव ने पक्ष रखा
वाराणसी। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट, द्वितीय) नितिन पाण्डेय की अदालत ने नाबालिग बच्चों से छेड़खानी करने और उनकी अश्लील फोटो व वीडियो बनाकर रंगदारी मांगने के मामले में आरोपित को जमानत दे दी। कन्दवा, मंडुआडीह निवासी आरोपित अनूप केशरी को 50-50 हजार रुपए की दो जमानतें एवं बंधपत्र देने पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, सौरभ गुप्ता, चंद्रेश यादव व संदीप यादव ने पक्ष रखा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार परमहंस नगर, कन्दवा, मंडुआडीह निवासी वादिनी ने मंडुआडीह थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि प्रार्थिनी पेशे से अध्यापिका है। प्रार्थिनी के दो बच्चे बड़ा बेटा 13 वर्ष व एक बेटी 11 वर्ष की है। प्रार्थिनी के पति व्यापारी है और सुबह 9 बजे घर से निकल जाते है। प्रार्थिनी भी स्कूल में पढ़ाती है। जिससे वह भी सुबह 9 बजे निकल जाती है। घर पर मात्र प्रार्थिनी के दोनों बच्चे अकेले रहते है। जिसका फायदा उठाते हुए अनुप केशरी प्रार्थी के घर आता और प्रार्थिनी के दोनों बच्चों के साथ अश्लील हरकत करता था।
वह दोनों बच्चों का नंगा फोटो व वीडियो बनाता है। जब प्रार्थिनी कभी घर पर जल्दी आ जाती और आरोपित को अपने घर देखती तो वह कहता की बस यूं ही आपसे मिलने आ गये और जब प्रार्थिनी घर पर जाती तो दोनो बच्चे डरे व सहमे रहते। इस पर जब प्रार्थिनी पूछती कोई बात है तो बच्चे बताने से इन्कार करते। प्रार्थिनी के दोनो बच्चे कई दिनो से बीमार व डरे है। जब प्रार्थिनी को शक हुआ तो प्रार्थिनी अपने बच्चे का मोबाइल चेक कि तो अनूप केशरी के इंस्ट्राग्राम से प्रार्थिनी के पुत्र के इंस्ट्राग्राम से अश्लील व गन्दी-गन्दी बातें बच्चे के प्राइवेट पार्ट का फोटो व आदि बातें करता था।
साथ ही आरोपित अनूप केशरी उक्त फोटो व वीडियो से ब्लैकमेल कर बच्चों से पैसा भी मांग रहा है। जिसपर प्रार्थिनी के बेटा ने 1000/- रूपया विपक्षी को दिया है और गन्दी लड़कियों के साथ अश्लील हरकत करने की कह रहा है। उक्त घटना से प्रार्थिनी व प्रार्थिती का परिवार डरा है। उक्त घटना के बारे में बच्चों से पूछ रही हूँ तो बच्चे रोने लग रहे हैं। इस मामले में आरोपित ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से कोर्ट में समर्पण कर जमानत के लिए अर्जी दी। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपित की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।





