वाराणसी : बुधवार को वाराणसी के प्रसिद्ध कालभैरव मंदिर में एक अद्भुत और मनमोहक दृश्य देखने को मिला। मौका था हरियाली श्रृंगार का, जब बाबा कालभैरव का दरबार हरे-भरे पत्तों, ताजे मौसमी फलों और रंग-बिरंगे फूलों से बेहद खूबसूरती से सजाया गया। यह नज़ारा श्रद्धा और प्रकृति के अनुपम संगम को दर्शाता था।
मंगला आरती से शुरू हुआ उत्सव, बारिश ने बढ़ाया सौंदर्य – भोर में मंगला आरती के साथ ही बाबा के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इसके बाद बाबा के हरियाली श्रृंगार दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। सुबह से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने इस आध्यात्मिक माहौल को और भी पवित्र और मनमोहक बना दिया। बूंदों के बीच भीगते हुए भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ, बल्कि आस्था का सौंदर्य और निखर उठा।
मेवा, फल और तुलसी से सजा बाबा का दरबार – मंदिर से जुड़े पंडित रुद्राक्ष ने बताया कि बाबा का यह विशेष श्रृंगार मेवा, फल, रजनीगंधा, तुलसी और विभिन्न प्रकार के हरे पत्तों से किया गया था। पूरा मंच और मंदिर प्रांगण हरियाली की मनमोहक छटा से सराबोर था, जो भक्तों को एक अलग ही शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करा रहा था।
भंडारे का आयोजन और भक्तों की भारी भीड़ – श्रृंगार के दर्शन के साथ-साथ मंदिर परिसर में भंडारे का भी भव्य आयोजन किया गया। शाम 6 बजे से लेकर रात 11 बजे तक बाबा का प्रसाद भक्तों के बीच वितरित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यह भक्तों के लिए एक और विशेष अवसर था, जहाँ वे एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण कर सके।
सुख-समृद्धि की कामना, पर्यावरण का सम्मान – श्रद्धालुओं का मानना है कि हरियाली तीज के आसपास इस तरह का श्रृंगार बाबा की विशेष कृपा को आकर्षित करता है। यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण के प्रति सम्मान और उसके संरक्षण का संदेश भी देती है। बारिश के बावजूद, भक्तों ने पूरी श्रद्धा के साथ दर्शन किए और अपने परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्यता की कामना की। मंदिर परिसर में गूंजते भक्ति गीत, भक्तों की सक्रिय भागीदारी और सुव्यवस्थित दर्शन ने इस पूरे आयोजन को सचमुच यादगार बना दिया।





