वाराणसी। आज के दौर में जहाँ शादियाँ दिखावे और भारी-भरकम खर्च का जरिया बनती जा रही हैं, वहीं वाराणसी की पावन धरा पर ‘दहेज मुक्त समाज’ की एक नई मिसाल पेश की गई है। ‘सामूहिक विवाह’ की बढ़ती प्रासंगिकता और सामाजिक चेतना के इस दौर में, विश्वविख्यात अघोरपीठ ‘बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड’ एक बार फिर हज़ारों परिवारों की उम्मीद का केंद्र बना।

अघोराचार्य महाराजश्री का अवतरण दिवस और पुण्य कार्य – 01 मई को रविन्द्रपुरी स्थित अघोरपीठ में वर्तमान पीठाधीश्वर अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी का ‘अवतरण दिवस’ हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर को सेवा का माध्यम बनाते हुए ‘सामूहिक विवाह’ का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें 55 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे।

कार्यक्रम का आगाज़ रात्रि 7:45 बजे हुआ, जहाँ महाराजश्री की उपस्थिति में हज़ारों श्रद्धालुओं ने ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष के साथ उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके तुरंत बाद ‘सामूहिक विवाह कार्यक्रम’ की मुख्य रस्में शुरू हुईं।

ज़रूरतमंद परिवारों का बना सहारा: ‘सामूहिक विवाह’ – ‘अघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान’ के सौजन्य से आयोजित इस ‘सामूहिक विवाह’ में देश के सुदूर इलाकों, विशेषकर अति विपन्न आदिवासी क्षेत्रों से चयनित जोड़ों का घर बसाया गया। संस्थान की देशव्यापी शाखाओं के कारण असल हकदार परिवारों तक पहुँचना संभव हो पाया।

इस आयोजन की कुछ प्रमुख विशेषताएँ : शून्य आर्थिक बोझ: वर-वधू पक्ष को यात्रा से लेकर विवाह तक का एक पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ा। उपहार व सहायता: आर्थिक सहायता राशि के साथ-साथ घरेलू उपयोग की ज़रूरी वस्तुएं भी प्रदान की गईं। पारंपरिक रीति-रिवाज: हल्दी की रस्म और लोकगीतों के साथ घरेलू माहौल में विवाह संपन्न हुआ। भक्ति और सेवा: हज़ारों स्वयंसेवक इस ‘सामूहिक विवाह कार्यक्रम’ को सफल बनाने के लिए तत्पर दिखे।

अघोर परंपरा और सामाजिक सरोकार – यह भव्य ‘सामूहिक विवाह’ उस मिथक को भी तोड़ता है कि अघोर परंपरा समाज से कटी हुई है। बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी के मार्गदर्शन में यह आयोजन सिद्ध करता है कि एक ‘अघोरी’ के सामाजिक सरोकार कितने गहरे और जन-कल्याणकारी हो सकते हैं।

रूबी सिंह (संयोजिका, महिला मंडल) के नेतृत्व में पारंपरिक गीतों ने पूरे परिसर को उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया। रात्रि 8 बजे के बाद खानपान और शानदार साज-सज्जा ने ‘सामूहिक विवाह कार्यक्रम’ की रौनक में चार चाँद लगा दिए।

कार्यक्रम में प्रियदर्शी बाबा, कर्मवीर बाबा, आह्वाहन अखाड़ा के पीठाधीश्वर अवधूत अरुण गिरी महाराज, शाही बाबा, प्रधान व्यवस्थापक अरुण सिंह, अनूप कुमार सिंह और रूबी सिंह सहित कई गणमान्य लोग और प्रशासनिक अधिकारी मुस्तैद रहे।

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