उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर शाम एक बड़ी समीक्षा बैठक की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी डीएम, एसपी, डीआईजी, आईजी रेंज, एडीजी ज़ोन और पुलिस कमिश्नर इस बैठक में शामिल हुए। इस दौरान बीते दिनों हुई घटनाओं और आगामी त्योहारों की सुरक्षा व्यवस्था पर गहन चर्चा की गई। बैठक में मुख्यमंत्री ने जहाँ दो जिलों की पुलिस के काम की तारीफ़ की, वहीं दो महत्वपूर्ण पुलिस कमिश्नरेट के सीपी को कड़ी फटकार भी लगाई।

बरेली और कानपुर पुलिस की सराहना मुख्यमंत्री ने बरेली पुलिस के त्वरित और प्रभावी एक्शन की विशेष रूप से सराहना की। बरेली में जुमे की नमाज के दौरान हुए फसाद को समय रहते काबू करने और मौलाना तौकीर रजा पर की गई कार्रवाई को मुख्यमंत्री ने सराहा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बलवाइयों पर ऐसी ही सख्त कार्रवाई की जरूरत है और यह कार्रवाई एक मिसाल है।

वहीं, कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के काम की भी मुख्यमंत्री ने तारीफ की। कानपुर में हुए एक विस्फोट की घटना पर पुलिस ने जिस तरह से समय रहते अफवाहों को रोका और अधिकारियों ने तत्काल मीडिया को घटना की असल वजह बताकर तमाम कयासों को खारिज किया, उसे मुख्यमंत्री ने सराहनीय बताया। यह दिखाता है कि संकट के समय में तत्काल और सही जानकारी देना कितना महत्वपूर्ण है।

वाराणसी और प्रयागराज के सीपी को हिदायत तारीफ़ के साथ-साथ, मुख्यमंत्री ने वाराणसी और प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट की कार्यशैली पर नाराजगी भी जताई।

वाराणसी में लगातार हो रही घटनाओं और सोशल मीडिया पर की जा रही अभद्र टिप्पणियों को लेकर मुख्यमंत्री बेहद नाराज दिखे। उन्होंने वाराणसी के पुलिस कमिश्नर से कड़े लहजे में पूछा कि मुख्यमंत्री कार्यालय से बताया न जाए तब तक क्या कार्रवाई नहीं होती है? यह टिप्पणी स्थानीय पुलिसिंग में ढिलाई और सुस्ती को दर्शाती है।

वाराणसी के साथ-साथ प्रयागराज की पुलिसिंग पर भी मुख्यमंत्री ने असंतोष व्यक्त किया। प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार को भी मुख्यमंत्री की फटकार का सामना करना पड़ा। ऐसा माना जा रहा है कि यह नाराजगी खासकर अपराध नियंत्रण और प्रभावी पुलिसिंग में कमी को लेकर थी।

मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया कि त्योहारों के इस मौसम में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस बैठक में अच्छा काम करने वाले जिलों की पीठ थपथपाई गई, वहीं ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई।

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