साभार – विनय मौर्या (वरिष्ठ पत्रकार, वाराणसी )

जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही अमूमन हर युवा किसी न किसी के आकर्षण में बंध जाता है। वह उसी के खयालों में खोया रहता है। सोते जागते उठते बैठते उसे वही याद रहता है। हां उसे प्यार हो जाता है। वह सपनों में जीने लगता है,कुछ पाने की ललक में कुछ खोने लगता है। मगर वह उस खोने से ज्यादा पाने के मोहपाश में खुद को कैद कर लेता है। हां,उसे प्यार हो जाता है। मगर पाने की इच्छा में दृण इच्छाशक्ति के साथ मनोबल का होना अत्यंत आवश्यक होता है वरना सपनों के बिखरने में देर नहीं लगता।

आज से तीन दशक पहले मुझे भी बेइंतहा प्यार हुआ था। मेरा भी मन कल्पनाओं की सागर में गोते लगा रहा था। मैं भी उसके प्रेम में दीवाना हो गया था । उसे हर जगह ढूंढता था। कहीं दिख जाने पर उसे पाने को लालायित हो जाता था।हां मुझे भी प्यार हुआ था, मगर किताबों से। मैंने भी सपने देखे थें मगर आईपीएस अधिकारी बनने का। जिस उम्र में लड़के विपरीत लिंगी आकर्षण में फंस जाते हैं। उस उम्र में मैं अपने पाकेट मनी से कबाड़ से किलो के भाव किताबें खरीदता और उसे पढ़ता था। उनमें मनोहर कहानियां, सत्यकथा,सखी सहेली,जनरल नॉलेज, उपन्यास, कॉमिक,फिटनेस धार्मिक किताबें होती थीं। मतलब की सिर्फ पढ़ने का जुनून और यह जुनून अखबारों के लिए भी था।मैं रोज सुबह उठकर चाय पान की दुकानों पर चला जाता और एक दो अखबारों को चाटने की हद तक पढ़ता रहता था। तब पढ़ने के लिए आज की तरह डिजिटल प्लेटफार्म सामाग्री नहीं होती थी। उस वक्त जानकारी का स्रोत अखबार किताबें,रेडीयो टीवी हुआ करते थें। वह भी सबके पहुँच तक नहीं।

चूंकि मैं अंतर्मुखी प्रवित्ति का हूँ। यह प्रवित्ति कम्पटीशन की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए कतई बेहतर नहीं है। आप अगर सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे हैं तो आपको बेबाक और मुखर होना चाहिए क्योंकि प्रिलिम्स मेंस के बाद इंटरव्यू में आपकी हाजिर जवाबी आपके बॉडी लैंग्वेज आप विषयों पर किस तरह सोचते हैं यह देखा जाता है। न कि भेड़ चाल और वाट्सपिया ज्ञान वहां काम आता है। और हां मेंस में जितना कम शब्दों में स्पष्ट बात निचोड़ कर रखेंगे उतना ही बेहतर अंक पाएंगे। और कार्य व्यहवार और सोचने का तरीका भी शुरू से ही अधिकारियों की तरह मेंटेन किये रहना चाहिए ताकि अचानक से असहज न होना पड़े।

खैर मेरे सपने पारिवारिक विवादों में फंसकर ध्वस्त हो गयें । उसी बीच 1997भैया का देहांत हो गया। और मैं अपने टूटे सपनों के साथ मात्र बाईस साल की उम्र में घर गृहस्थी के लिए कमाने में लग गया। ऊपर से मेरे पिता के बे-ईमान भाई का कहर बेपनाह मेरे ऊपर टूटता रहा। वैसे किस्मत जब भांग खाकर बैठी होती हो तो कोई विनय मौर्या पैदा होता है। क्योंकि तबसे अबतक मेरी इच्छाओं मेरे सपनों की एक लंबी कब्र मेरे दिल मे बन चुकी है।

यह पोस्ट उन युवाओं और उनके अभिभावकों के लिए है । जो युवा पढ़ाई तो कर रहे हैं। मगर बनना क्या है उन्हें खुद ही नहीं पता। बल्कि फ़टे जीन्स और स्पोर्टस बाइक के साथ विपरीत लिंगी आकर्षण में अपना समय पैसा और करियर खराब कर रहे हैं। मैं कहता हूं कि उन्हें किताबों से प्रेम करना चाहिए क्योंकि किताबों को प्रेमिका बनाने से एक आप उस मुकाम को पा लेंगे जहां आपसे अप्सरा क्या पूरी दुनियां प्यार करेगी। आप ऑफिसर बनके अपने सपनों की रानी को भी पा सकते हैं।लड़के लड़कियां तो एक बार बेवफा भी हो सकते हैं। मगर किताबें कभी बेवफ़ा नहीं होंतीं वह कभी आपको निराश नहीं करेंगी।
आप जवानी में पढ़ाई का महत्व समझ गए तो आप तो सम्मान पाएंगे ही बुढ़ापे में आपके मां बाप भी हर कदम पर सम्मान पाएंगे। और सिविल सर्विस को किसी हौव्वा की तरह मत लीजिए यह मत सोचिए कि जो लोग सक्सेज होते हैं। वह किसी दूसरी दुनिया से आये होते हैं। बल्कि अपने में जोश भरिये की हां मैं भी इस क़ाबिल हूँ मैं भी आईएएस पीसीएस क्वालीफाई कर सकता हूँ। अगर असफलता हाथ भी लगे तब भी निराश न होयें। असफलता यह बताती है कि हम कहाँ चुकें। हां मगर इसके लिए दिमाग को गूगल बनाना होगा आपके लगभग दस हजार से ज्यादा प्रश्नोत्तरी दिमाग में फीड करना होगा। इसके लिए किताबों को कई बार पढ़ना होगा। चूंकि आज डिजिटल युग है सोशल मीडिया का जमाना है तो बहुत से कंटेंट और मोटिवेशनल वीडियो आपको यूट्यूब पर मिल जाएंगे। मैं यूट्यूब पर आज भी आईएएस कोचिंग क्लासेज देखता सुनता हूँ। आज भी लगातार मोबाईल में देश दुनिया को पढ़ता हूँ। क्योंकि पढ़ाई कभी जाया नहीं होती।

और सभी माता पिता अभिभावक जान समझ लें कि दो रोटी कम खाना मगर अपने बच्चे को खूब पढ़ाना। और अगर वह परीक्षा में बेहतर परिणाम नहीं ला पा रहे हों तो भी उन्हें हताश निराश मत होने देना उनका मनोबल बढ़ाना। उन्हें अधिकारीयों का अधिकार क्या होता है उनका रुतबा क्या होता है। यह अवश्य बताना दिखाना। मैं जानता हूँ कि अब मेरा वक्त निकल गया है मगर मैं पढ़ाई कर रहे हर लड़के के अंदर अपने सपनों को जीवित रखता हूँ। उन्हें सिविल सर्विसेज के लिए मोटिवेट करता हूं। चाहे दोस्त के हों रिश्तेदार के हों या फेसबुक के बहुत से युवा मेरी बातों को जानते समझते हैं। युवाओं से कहूंगा कि फेसबुक इंस्टाग्राम से ज्यादा यूट्यूब गूगल पर समय दें हर विषय की बेहतर जानकारी वहां उपलब्ध है कुछ अपवादों को छोड़कर। और फोन कालिंग का प्रयोग कम कर करें क्योंकि मोबाइल का रेडिएशन आपकी याददाश्त क्षमता को कम करता जाता है। और पढ़ाई में यादाश्त का महत्त्व बेहद महत्वपूर्ण है।

अच्छा जानना चाहेंगे कि मैं आईपीएस ही क्यों बनना चाहता था। जबकि पूरे देश में तीन महत्वपूर्ण पद होते हैं। पीएम सीएम डीएम। क्योंकि मैं यह जानता था कि आईएएस के अधिकार एक आईपीएस की तुलना में ज्यादा है। मगर यह वर्दी का खाकी रंग दिल पर ऐसा चढ़ा की आज तक उतरा ही नहीं। इसलिए कई बार वर्दीधारीयों के दुर्व्यवहार का शिकार होने के बावजूद उनके खिलाफ कभी मोर्चा नहीं खोला बल्कि अपने खबरों में उनकी समस्याओं उनके दर्दों को ही बयां किया है। अध्ययन ही सबसे बड़ा धन है।

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