नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते का सकारात्मक असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था के हर कोने में दिखने लगा है। शेयर बाजार के बाद अब कमोडिटी मार्केट, विशेषकर सोने-चांदी की कीमतों में मंगलवार को एक बड़ी हलचल देखी गई। अमेरिकी टैरिफ में 18 फीसदी की कटौती की खबर ने सर्राफा बाजार में नई जान फूंक दी है।

पिछले पांच कारोबारी दिनों से लगातार दबाव झेल रहे सर्राफा बाजार में मंगलवार को खरीदारों ने जमकर वापसी की। अखिल भारतीय सर्राफा बाजार के आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमतों में लगभग ₹6,050 की भारी तेजी दर्ज की गई है। इस उछाल के बाद 24 कैरेट (99.9%) शुद्ध सोना: ₹1,49,200 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। तेजी का कारण: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की कमजोरी और वैश्विक बाजार में गोल्ड को मिले मजबूत सपोर्ट ने घरेलू बाजार में सोने की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया।

सोने से भी अधिक चौंकाने वाली तेजी चांदी के भाव में देखी गई। बीते सोमवार को बड़ी गिरावट झेलने वाली चांदी ने मंगलवार को करीब 9 फीसदी की छलांग लगाई। चांदी का नया भाव: ₹20,940 की बढ़त के साथ अब चांदी ₹2,54,200 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार (2 फरवरी) को बाजार में काफी मायूसी थी, जब चांदी अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे गिर गई थी। लेकिन सोने-चांदी की कीमतों में आई इस ताजा रिकवरी ने निवेशकों और कारोबारियों को बड़ी राहत दी है।

भारतीय बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखी जा रही है। कमेक्स (COMEX) गोल्ड: सोना करीब 137 डॉलर (3%) चढ़कर 4,789 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। कमेक्स (COMEX) सिल्वर: चांदी में 5.81% का उछाल आया और यह 81 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गई।

कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के चलते लॉजिस्टिक और टैरिफ से जुड़ी बाधाएं कम हुई हैं, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ा है। वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर इंडेक्स की चाल को देखते हुए सोने-चांदी की कीमतों में अभी और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, जानकारों के मुताबिक लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा स्तर काफी महत्वपूर्ण और निवेश के लिहाज से बेहतर साबित हो सकते हैं।

    यदि आप भी सर्राफा बाजार में निवेश की योजना बना रहे हैं, तो सोने-चांदी की कीमतों पर बारीकी से नजर रखना जरूरी है क्योंकि वैश्विक भू-राजनीतिक हालात पल-पल बाजार का रुख बदल रहे हैं।

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