कोटपूतली | राजस्थान की न्याय व्यवस्था में अक्सर तारीखों का सिलसिला लंबा चलता है, लेकिन कोटपूतली-बहरोड़ जिले के पावटा न्यायालय ने गुरुवार को एक ऐसा उदाहरण पेश किया जो इतिहास बन गया। यहाँ चोरी के एक मामले में पुलिस और न्यायालय की तत्परता का ऐसा नज़ारा दिखा कि सुबह चालान पेश हुआ, दोपहर में बहस हुई और शाम ढलने से पहले फैसला भी आ गया।

इस मामले की गति देखकर हर कोई हैरान है। पावटा न्यायालय के न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. अजय कुमार बिश्नोई ने मिसाल पेश करते हुए बिना किसी ब्रेक के लगातार सुनवाई की। सुबह 11:30 बजे: पुलिस द्वारा कोर्ट में चालान पेश किया गया। दस्तावेजों की जांच: 50 महत्वपूर्ण दस्तावेजों का बारीकी से अवलोकन हुआ। गवाहों के बयान: रिकॉर्ड समय में 7 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। शाम 5:00 बजे: कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाते हुए तीनों अभियुक्तों को सजा दे दी। सुनवाई की खास बात यह रही कि डॉ. अजय कुमार बिश्नोई ने न तो लंच ब्रेक लिया और न ही चैंबर में समय बिताया। उन्होंने लगातार कोर्ट रूम में बैठकर इस तेज़ न्याय की प्रक्रिया को अंजाम दिया।

न्यायालय ने आरोपी विजयपाल, कपिल और राजेश को चोरी का दोषी पाया। कोर्ट ने तीनों दोषियों को 3-3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, प्रत्येक अपराधी पर 20-20 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया। अभियोजन अधिकारी डॉ. पंकज यादव के अनुसार, प्रदेश में संभवतः यह पहला ऐसा मामला है जहाँ चालान पेश होने के कुछ ही घंटों के भीतर फैसला सुना दिया गया। बीती 5 जनवरी की रात को नारायणपुर मोड़ पर स्थित हरिओम जनरल स्टोर, श्री श्याम मिष्ठान भंडार, एम.एस. मोबाइल सेंटर और मानवी हेल्थ केयर के शटर तोड़कर चोरों ने नकदी चोरी की थी। थाना प्रभारी भजनाराम की टीम ने कड़ी मेहनत कर 27 जनवरी को नीमराणा निवासी आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

कोटपूतली के इस मामले ने साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो न्याय मिलने में देरी नहीं होती। 29 जनवरी को चालान पेश होने से लेकर फैसले तक की यह प्रक्रिया अपराधियों के लिए एक सख्त चेतावनी है कि वे अब कानून की पकड़ से बच नहीं सकते। bmbreakingnews.com इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करता है, जो जनता के मन में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास को और मजबूत करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *