भारतीय राजनीति में एक ऐसा भूचाल आया है जिसने आम आदमी पार्टी की नींव हिलाकर रख दी है। कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद और ‘दाएं हाथ’ माने जाने वाले राघव चड्ढा ने पार्टी से इस्तीफे का संकेत देते हुए एक बेहद रहस्यमयी बयान दिया है। चर्चा है कि राघव चड्ढा सात अन्य सांसदों के साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय की तैयारी कर रहे हैं।

“मेरी आँखें ठीक हो गई हैं” – राघव चड्ढा का बड़ा बयान – लंदन में आंखों के ट्रीटमेंट के बाद लौटे राघव चड्ढा ने अरविंद केजरीवाल को संबोधित करते हुए कहा :
“सर जी, अब मेरी आँखें ठीक हो गई हैं, ट्रीटमेंट पूरा हो गया है और अब मुझे सबकुछ साफ़-साफ़ दिखाई दे रहा है।”
इस बयान को राजनीतिक गलियारों में एक बड़े ‘मिशन’ के पूरा होने के तौर पर देखा जा रहा है। राघव चड्ढा को न केवल केजरीवाल का करीबी माना जाता था, बल्कि उन्हें उनके उत्तराधिकारी के रूप में भी देखा जा रहा था। ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना आम आदमी पार्टी के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं है।
क्या राघव चड्ढा थे ‘मिशन’ पर? – सोशल मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अब राघव चड्ढा को लेकर कई तरह की थ्योरी चल रही हैं। कुछ लोग उन्हें “मिशन पूर्ण” करने वाला सिपाही बता रहे हैं, तो कुछ उन्हें पार्टी का सबसे बड़ा राज़दार मान रहे हैं। चड्ढा को पार्टी में ‘फ्री हैंड’ मिला हुआ था, और उन्होंने उसी का इस्तेमाल कर अब पाला बदलने का मन बना लिया है।
मुख्य घटनाक्रम : इस्तीफा और विलय: चर्चा है कि राघव चड्ढा अकेले नहीं, बल्कि सात सांसदों के एक बड़े गुट के साथ बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। केजरीवाल को झटका: अरविंद केजरीवाल के लिए यह एक निजी और राजनैतिक हार मानी जा रही है, क्योंकि राघव उनके हर रहस्य और रणनीति के हिस्सेदार थे। नया ट्विस्ट: अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या आने वाले समय में राजनीति में कोई और बड़ा धमाका होने वाला है?
भारतीय राजनीति में मचेगा तहलका – अगर राघव चड्ढा का बीजेपी में विलय सच साबित होता है, तो यह आम आदमी पार्टी के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा होगा। चड्ढा न केवल एक युवा चेहरा थे, बल्कि पार्टी के ‘फाइनेंशियल और स्ट्रेटेजिक’ दिमाग भी माने जाते थे। उनके जाने से पार्टी के कई गुप्त मार्ग और राज़ सार्वजनिक होने का डर है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह सिलसिला यहीं नहीं रुका, तो भारतीय राजनीति में एक ऐसी ‘आग’ लग सकती है जिसे बुझाना केजरीवाल के लिए नामुमकिन होगा।
राघव चड्ढा का “साफ़-साफ़ दिखने” वाला तंज सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल की राजनीति पर प्रहार है। अब देखना यह होगा कि आम आदमी पार्टी इस बगावत को कैसे संभालती है और क्या वाकई सात सांसद पार्टी का साथ छोड़ देंगे?




