बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कुलदीप गुप्ता, हृदयानंद यादव एवं रवि कुमार ने पक्ष रखा।

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद की एक स्थानीय अदालत ने दहेज उत्पीड़न और मारपीट से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कक्ष संख्या-7, वाराणसी द्वारा मुकदमा संख्या 217927/2022, राज्य बनाम आदित्य शंकर गुप्ता एवं अन्य के मामले में सुनवाई करते हुए सभी अभियुक्तों को ससम्मान बरी करने का आदेश दिया है।

क्या था पूरा मामला? यह मामला थाना लोहता से संबंधित है, जिसमें अपराध संख्या 120/2022 के अंतर्गत धारा 498ए (दहेज उत्पीड़न), 323, 504, 506 भारतीय दंड संहिता (IPC) तथा धारा 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए थे। वादी पक्ष की ओर से अभियुक्त आदित्य शंकर गुप्ता एवं उनके परिजनों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था।

न्यायालय का निर्णय और साक्ष्यों का परीक्षण दिनांक 08 मई 2026 को महत्वपूर्ण निर्णय पारित किया गया, जिसमें माननीय न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध समस्त मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। न्यायालय ने गवाहों के कथनों और अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत अभिलेखों का गहन परीक्षण करने के उपरांत यह पाया कि अभियोजन पक्ष अभियुक्तगण के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को “युक्तियुक्त संदेह से परे” सिद्ध करने में पूरी तरह असफल रहा।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ठोस साक्ष्यों की कमी और विरोधाभासी बयानों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। फलस्वरूप, न्यायालय द्वारा अभियुक्तगण को संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) देते हुए दोषमुक्त/बरी किए जाने का आदेश दिया गया।

बचाव पक्ष की प्रभावशाली पैरवी इस केस में अभियुक्त पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कुलदीप गुप्ता, हृदयानंद यादव एवं रवि कुमार ने प्रभावशाली, तथ्यपरक एवं सशक्त बहस प्रस्तुत की। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अभियोजन की कहानी में मौजूद कानूनी कमियों और साक्ष्यों की अपर्याप्तता को प्रमुखता से कोर्ट के सामने रखा। उन्होंने विभिन्न न्यायिक दृष्टांतों (Judicial Precedents) का हवाला देते हुए यह साबित किया कि अभियुक्तों को झूठा फंसाया गया है।

सहयोगी अधिवक्ताओं का योगदान वाद की सफल पैरवी में सहयोगी अधिवक्ताओं के रूप में सत्यम गुप्ता, अधिवक्ता महिमा गुप्ता, राज चौधरी एवं राजेश गुप्ता द्वारा भी महत्वपूर्ण विधिक सहयोग प्रदान किया गया। बचाव पक्ष की इस सुदृढ़ और एकजुट विधिक टीम के प्रयासों के परिणामस्वरूप ही माननीय न्यायालय ने न्यायोचित फैसला सुनाते हुए अभियुक्तों को दोषमुक्त किया। इस फैसले के बाद अधिवक्ता समाज और अभियुक्त पक्ष ने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त किया है।

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