वाराणसी। कैंट थाना क्षेत्र में गुंडा निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामले में अभियुक्त सोनू कन्नौजिया (पुत्र रमेश कन्नौजिया) को अदालत से बड़ी राहत मिली है। मु०अ०सं०-400/2025, धारा-3/10 गुंडा निवारण अधिनियम के अंतर्गत दर्ज इस मुकदमे में उनकी जमानत अर्जी स्वीकार कर ली गई है। अदालत में आरोपी कि ओर से अधिवक्ता शिवम ने पक्ष रखा।
सोनू कन्नौजिया न्यायिक हिरासत में थे। उनके वकील और अभियोजन पक्ष के अधिकारी को सुनने तथा केस से जुड़े दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद, अदालत ने यह फैसला सुनाया।
अभियुक्त के वकील का तर्क : सोनू कन्नौजिया के विद्वान अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल ने कोई अपराध नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि सोनू को कैंट थाने द्वारा “फर्जी मुकदमे और बीट सूचना” के आधार पर गुंडा घोषित किया गया है। वकील ने बताया कि सोनू कन्नौजिया के खिलाफ पहले भी दर्ज मु०अ०सं०-27/2020, मु०अ०सं०-79/ 2020, मु०अ०सं०-04/2022 और मु०अ०सं०-544/2023 जैसे सभी मामलों में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है और ये मामले अभी भी न्यायालय में विचाराधीन हैं।
यह भी बताया गया कि संयुक्त पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट न्यायालय से भी सोनू को जमानत मिल चुकी है। इसके अतिरिक्त, अपर पुलिस आयुक्त द्वारा 15.05.2025 से 15.07.2025 तक उन्हें जिला बदर किया गया था। वकील ने जोर दिया कि सोनू पर लगाए गए अपराध सात साल से कम सजा वाले हैं, और इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।
अभियोजन अधिकारी का विरोध : दूसरी ओर, अभियोजन अधिकारी ने जमानत का प्रबल विरोध करते हुए कहा कि 12 जुलाई 2025 के आदेश के आलोक में सोनू कन्नौजिया से संबंधित थाने से रिपोर्ट प्राप्त हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, अभियुक्त के खिलाफ स्थानीय थाने में कुल 04 मामले दर्ज हैं और वर्तमान अपराध अजमानतीय है।
न्यायालय का निर्णय : हालांकि, न्यायालय ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार किया। न्यायालय ने पाया कि वर्तमान मामला जिला बदर आदेश के उल्लंघन से संबंधित है और इसमें विवेचना अभी भी जारी है। अभियुक्त 12 जुलाई 2025 से जिला कारागार में बंद है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय ने माना कि जमानत देने का पर्याप्त आधार है।
अदालत ने आदेश दिया कि मु०अ०सं०-400/2025, धारा-3/10 गुंडा निवारण अधिनियम, थाना कैंट, जनपद वाराणसी में अभियुक्त सोनू कन्नौजिया (पुत्र रमेश कन्नौजिया) को 25,000/- रुपये के व्यक्तिगत बंध पत्र और समान धनराशि की दो प्रतिभू (गारंटर) प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा किया जाए।





