न्यायालय में आरोपी की जमानत याचिका का विरोध वादी के अधिवक्ता मयंक मिश्रा, शुभेन्दु पाण्डेय, विजय पाण्डेय, सर्वेश चौबे ने किया।

वाराणसी : जनपद के थाना चितईपुर अंतर्गत सुसुवाही इलाके में हुई मारपीट और मोबाइल लूट के मामले में आरोपी नीलेश दुबे उर्फ राजा दुबे को न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश / विशेष न्यायाधीश (आवश्यक वस्तु अधिनियम), वाराणसी ने अभियुक्त की प्रथम जमानत प्रार्थना पत्र (सं०-1104/2026) को अपराध की गंभीरता और तथ्यों को छिपाने के आधार पर निरस्त कर दिया है। न्यायालय में आरोपी की जमानत याचिका का विरोध वादी के अधिवक्ता मयंक मिश्रा, शुभेन्दु पाण्डेय, विजय पाण्डेय, सर्वेश चौबे ने किया।

क्या था पूरा मामला? (घटनाक्रम) अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला दिनांक 26.03.2026 का है। वादी मुकदमा गौरव सिंह ने तहरीर दी थी कि जब वह अपने दोस्त आदित्य मिश्रा के साथ सुसुवाही ऑफिस जा रहा था, तभी अमन टी स्टाल के पास बाइक सवार युवकों ने टक्कर मारी और गाली-गलौज की। विवाद बढ़ने पर अभियुक्त राजा दुबे अपने साथियों के साथ लोहे की फन्टी और लात-घूंसों से हमला कर दिया। इस हमले में आदित्य मिश्रा का सिर फट गया और वह बेहोश हो गया। इसी दौरान उसका कीमती मोबाइल (Samsung S24 Ultra) भी गायब हो गया। घटना के बाद आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए थे।

कोर्ट में जमानत के खिलाफ कड़े तर्क न्यायालय में सुनवाई के दौरान, अभियुक्त नीलेश दुबे के वकील ने तर्क दिया कि वह एक विधि छात्र है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। हालांकि, सरकारी वकील (विद्वान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता) व वादी के अधिवक्ता मयंक मिश्रा, शुभेन्दु पाण्डेय, विजय पाण्डेय, सर्वेश चौबे ने इसका कड़ा विरोध किया।

न्यायालय ने जमानत खारिज करने के पीछे मुख्य आधार बताए गंभीर चोटें: मेडिकल रिपोर्ट (डॉ. राजेश कुमार सिंह) के अनुसार, घायल आदित्य के सिर पर गहरे घाव थे और 5 टांके लगे थे। हमला ‘हार्ड और धारदार’ हथियार से किया गया था। आपराधिक इतिहास छिपाना: अभियुक्त ने कोर्ट में हलफनामा दिया था कि उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, जबकि पुलिस रिपोर्ट के अनुसार उसके विरुद्ध कुल 6 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। लूट का मोबाइल बरामद: पुलिस ने लूटा गया मोबाइल फोन अभियुक्त के पास से ही बरामद किया था। झूठे तथ्य: कोर्ट ने माना कि अभियुक्त ने वास्तविक तथ्यों को छुपाकर असत्य कथनों के आधार पर जमानत की अर्जी दी थी।

कानूनी धाराओं का विवरण वाराणसी की चितईपुर पुलिस ने अभियुक्त के खिलाफ मु०अ०सं०-80/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित गंभीर धाराओं धारा 191(2), 115(2), 352, 351(3), धारा 110, 309(6), 317(2) बी०एन०एस० में मामला दर्ज किया है।

    न्यायालय का फैसला: समस्त तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभियुक्त को जमानत पर रिहा करने का आधार पर्याप्त नहीं है और उसकी याचिका निरस्त की जाती है।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *