वाराणसी : उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मंगलवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब जिला जेल चौकाघाट में बंद आशुतोष उर्फ मोहित सिंह की संदिग्ध मौत के बाद उनके परिजनों ने कचहरी में शव रखकर ज़ोरदार प्रदर्शन किया। गुस्साए परिजनों ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए और सच्चाई छिपाने का दावा किया। वे जिलाधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे, जबकि पुलिस उन्हें समझाने-बुझाने में जुटी रही।
दिसंबर 2021 से धारा 376 और पॉक्सो एक्ट के तहत जेल में बंद आशुतोष की मौत को लेकर परिजन कई सवाल उठा रहे हैं। जेल प्रशासन के मुताबिक, 14 जुलाई की सुबह आशुतोष ने सीने में दर्द की शिकायत की थी। जेल अस्पताल में शुरुआती इलाज के बाद उसे कबीरचौरा मंडलीय अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिजनों का दावा: अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी मौत – हालांकि, परिजनों ने जेल प्रशासन के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका साफ कहना है कि आशुतोष की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी। इस दावे को और बल तब मिला जब मंडलीय अस्पताल के डॉक्टर जयेश मिश्रा ने बताया कि आशुतोष को मृत अवस्था में ही अस्पताल लाया गया था। इससे यह पूरा मामला और भी संदिग्ध हो गया है।
कचहरी में हंगामा और तनाव का माहौल – जेल के अफसरों पर गुस्साए परिजनों ने मंगलवार को मृतक आशुतोष का शव कचहरी में रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। “जेल प्रशासन ने हमें गुमराह किया, सच्चाई छिपाने के लिए औपचारिकताएं पूरी की गईं,” परिजनों ने चिल्लाते हुए कहा। प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। स्थिति बेकाबू होने की आशंका को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। अधिकारियों के समझाने-बुझाने के बावजूद परिजन अपनी मांग पर अड़े रहे कि जिलाधिकारी मौके पर आकर उनसे बात करें।
पुलिस और परिजनों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन परिजनों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा। इस संदिग्ध मौत ने जेल प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं और अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।





