पन्ना में आदिवासी दलित क्रांति सेना के संयोजक केपी सिंह बुंदेला ने प्रशासन को चेतावनी दी है। वन अधिकार कानून के उल्लंघन और किसानों की फसल बर्बादी के खिलाफ 2027 में बड़े आंदोलन की तैयारी।
पन्ना, मध्य प्रदेश। बुंदेलखंड की धरती पर आदिवासियों और दलितों के हक की लड़ाई अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। आदिवासी दलित क्रांति सेना (बुंदेलखंड) के संयोजक केपी सिंह बुंदेला ने मीडिया से मुखातिब होते हुए शासन और प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। बुंदेला ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रशासन ‘कुंभकरणी नींद’ में सोया हुआ है, जबकि गरीब आदिवासी किसान अपनी जमीन और हक के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
प्रशासन की ‘वादाखिलाफी’ और आक्रोश – केपी सिंह बुंदेला ने बताया कि 14 जनवरी से लगातार वन विभाग और प्रशासन के खिलाफ आंदोलन जारी है, लेकिन अधिकारी इसे अनसुना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “शाहनगर में हजारों आदिवासियों ने चक्का जाम किया था, तब प्रशासन ने वादे किए थे, लेकिन वे सब खोखले साबित हुए। प्रशासन की इस वादाखिलाफी से आदिवासियों और दलितों में भारी आक्रोश है।”
कानून की धज्जियाँ उड़ा रहा वन विभाग? – बुंदेला ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वन अधिकार कानून के अध्याय-3 की उपधारा 5 का सरेआम उल्लंघन किया जा रहा है। प्रशासन और वन विभाग द्वारा जेसीबी (JCB) मशीनों से आदिवासी किसानों की खड़ी फसलों को रौंदा जा रहा है।
कानूनी प्रक्रिया का हवाला देते हुए उन्होंने कहा:
“नियम के अनुसार, दावा आवेदन पत्र की सत्यापित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई कार्रवाई की जा सकती है। अगर दो बुजुर्ग यह सत्यापित कर देते हैं कि आदिवासी किसान का कब्जा 2005 से पहले का है, तो उसे पट्टा पाने का कानूनी अधिकार है। लेकिन यहाँ बिना प्रक्रिया के ही गरीबों का दमन किया जा रहा है।”
आगामी रणनीति साझा करते हुए बुंदेला ने कहा कि अब चुप बैठने का समय निकल चुका है। वर्ष 2026: इस पूरे साल आदिवासियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक और लामबंद किया जाएगा। वर्ष 2027: अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर एक ऐतिहासिक आंदोलन किया जाएगा।
“ईंट का जवाब पत्थर से देंगे” – तहसीलदार के माध्यम से मध्य प्रदेश शासन को लगातार ज्ञापन भेजे जा रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने पर संगठन ने अब आर-पार की जंग का मन बना लिया है। केपी सिंह बुंदेला ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “आदिवासी अब चुप नहीं बैठेगा। समय आने पर ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा। अब आंदोलन सड़कों पर होगा और शासन के खिलाफ मैदान तैयार है।”
इस बयान के बाद पन्ना जिले के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस चेतावनी के बाद जागता है या आदिवासियों का यह गुस्सा किसी बड़े जन-आंदोलन का रूप लेता है।





