वाराणसी: धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में इन दिनों वाराणसी में अवैध निर्माण जोरों पर है। एक तरफ जहां वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा (वीडीए प्रशासन) अवैध निर्माणों पर अंकुश लगाने और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर धरातल पर स्थिति इसके उलट नजर आ रही है। क्षेत्रीय अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से शहर के विभिन्न कोनों में अवैध निर्माण का खेल धड़ल्ले से जारी है।
नाटीइमली भरत मिलाप कॉलोनी में मानकों की अनदेखी – ताजा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के नाटीइमली स्थित भरत मिलाप कॉलोनी का है। यहाँ भवन संख्या 67/85, 37 के बगल में एक विशाल निर्माण कार्य कराया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों और मौके की स्थिति के अनुसार, यह निर्माण पूरी तरह से मानकों के विपरीत और अवैध तरीके से किया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में हो रहे इस निर्माण पर वाराणसी में अवैध निर्माण जोरों पर, विभाग मौन वाली कहावत सटीक बैठ रही है। बिल्डरों और रसूखदार भवन स्वामियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न तो नियमों की परवाह है और न ही प्रशासन का डर।
VDA की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल – वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष भले ही अवैध निर्माणों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं, लेकिन क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों की मौन सहमति कई सवाल खड़े करती है। क्या इन अवैध निर्माणों की जानकारी क्षेत्रीय जेई (JE) और सुपरवाइजर को नहीं है? क्या बिना नक्शा पास कराए या स्वीकृत मानचित्र के विपरीत हो रहे इन कार्यों को प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है? जब वाराणसी में अवैध निर्माण जोरों पर होते हैं और विभाग मौन रहता है, तो इससे न केवल शहर का स्वरूप बिगड़ता है, बल्कि भविष्य में सीवर, बिजली, दुर्घटनाये और यातायात जैसी समस्याओं का बोझ भी बढ़ता है।
बीएम ब्रेकिंग न्यूज की प्रतिबद्धता – बीएम ब्रेकिंग न्यूज अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए शासन-प्रशासन और अपने दर्शकों को शहर में हो रहे ऐसे हर अवैध निर्माण से अवगत कराता रहेगा। नाटीइमली का यह मामला तो महज एक बानगी है, शहर के कई अन्य इलाकों में भी इसी तरह नियमों को ताक पर रखकर कंक्रीट के जंगल खड़े किए जा रहे हैं।
वाराणसी के विकास के लिए जरूरी है कि भ्रष्ट अधिकारियों और अवैध निर्माण करने वाले सिंडिकेट पर नकेल कसी जाए। अब देखना यह है कि इस खबर के बाद क्या वाराणसी विकास प्राधिकरण इस विशेष निर्माण पर कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर “मौन” की यह स्थिति यूं ही बनी रहती है।





