वाराणसी। कचहरी के विस्तारीकरण और अधिवक्ताओं की मूलभूत सुविधाओं को लेकर न्यायिक जगत में सुगबुगाहट तेज हो गई है। आज दी बनारस बार एसोसिएशन वाराणसी के तत्वाधान में चंद्रशेखर आजाद पार्क, लहुराबीर में एक विशाल हस्ताक्षर अभियान और सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वाराणसी कचहरी के विस्तारीकरण की मांग को लेकर 200 से अधिक अधिवक्ता एकजुट हुए और अपनी आवाज बुलंद की।

कचहरी विस्तारीकरण के लिए जमीन अधिग्रहण की मांग सभा के दौरान अधिवक्ताओं ने एक स्वर और एकमत से यह बात रखी कि वाराणसी कचहरी का विस्तारीकरण समय की मांग है। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि कचहरी परिसर के विस्तार के लिए सरकार को बनारस क्लब, उद्यान विभाग और कमिश्नर बंगला की जमीन को अधिग्रहित करना चाहिए। इन जमीनों को न्यायालय परिसर का हिस्सा बनाकर अधिवक्ताओं और वादकारियों की समस्याओं का स्थाई समाधान निकाला जा सकता है।

इंटीग्रेटेड कोर्ट कैंपस और विस्थापन का विरोध – अधिवक्ताओं ने हुंकार भरते हुए कहा कि आज दी बनारस बार एसोसिएशन वाराणसी के तत्वाधान में यह संकल्प लिया गया है कि कलेक्टरेट कंपाउंड में इंटीग्रेटेड कोर्ट कैंपस के निर्माण की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।

अधिवक्ताओं ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि किसी भी स्थिति में व्यवहार न्यायालय का स्थानांतरण या विस्थापन स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिवक्ता समाज को बांटने की किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। कचहरी के आसपास की जमीनों का अधिग्रहण कर अधिवक्ताओं के बैठने की समुचित व्यवस्था की जाए।

वरिष्ठ अधिवक्ताओं और गणमान्य नागरिकों की रही उपस्थिति इस महत्वपूर्ण हस्ताक्षर अभियान और सभा की अध्यक्षता विनोद कुमार शुक्ला ने की, जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन सुधांशु मिश्रा द्वारा किया गया।

आज दी बनारस बार एसोसिएशन वाराणसी के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से पी. एन. सिंह, मीरा यादव, सेंट्रल बार के पूर्व महामंत्री अनिल पाठक, बनारस बार के पूर्व महामंत्री कमलेश सिंह यादव, नित्यानंद राय, पूर्व अध्यक्ष पंडित धीरेंद्र नाथ शर्मा, सत्य प्रकाश सुनील, उदयनाथ शर्मा, रजनीकांत मिश्रा और नवीन जी उपस्थित रहे।

साथ ही अनिल तिवारी, अनुराग द्विवेदी, प्रियंक पारीक, राघवेंद्र नारायण दूबे, विंध्याचल चौबे, मयंक मिश्रा, सतीश यादव (उपाध्यक्ष), विकास गुप्ता, संजय वर्मा, सुमित उपाध्याय, सौरभ चन्द्र पांडे, पंकज, अनिल सिंह, पंडित रमेश उपाध्याय, प्रेमचंद बच्चन, राहुल गुप्ता, मनमोहन गुप्ता, पवन वर्मा, अमरदीप सिंह, आशीष सिंह, अभिषेक चौबे, विकास सिंह, सुनील मिश्रा, सुनील दत्त मिश्रा, बलदेव त्रिपाठी, आशुतोष शुक्ला, अवनीश त्रिपाठी, जितेंद्र श्रीवास्तव, शिवाकांत पांडे, शुभम प्रकाश सिंह, सूरज सिंह समेत काशी के अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

अधिवक्ताओं का कहना है कि कचहरी का विस्तारीकरण न केवल वकीलों के हित में है, बल्कि यह न्याय प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए भी आवश्यक है। अब देखना यह है कि प्रशासन और सरकार अधिवक्ताओं की इन जायज मांगों पर क्या रुख अपनाती है।

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