वाराणसी (bmbreakingnews.com)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एक बड़ी कानूनी खबर सामने आ रही है। धर्म नगरी काशी के हरतीरथ इलाके में दुकान कब्जा करने का विरोध करने पर एक व्यवसायी पर जानलेवा हमला, लूटपाट और तोड़फोड़ के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। इस पूरे प्रकरण में कोर्ट ने वाराणसी में हिंदू युवा वाहिनी पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश कोतवाली थाना प्रभारी को दिया है।
यह आदेश अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (नवम) अमित कुमार यादव की अदालत ने पीड़ित व्यवसायी की अर्जी पर सुनवाई करते हुए जारी किया। कोर्ट के इस फैसले के बाद से ही स्थानीय पुलिस और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला? – यह पूरा मामला हरतीरथ निवासी मुकुंद यादव से जुड़ा है, जिन्होंने अपनी आपबीती अदालत के सामने रखी। मुकुंद यादव ने अपने अधिवक्ताओं अनुज यादव, नरेश यादव और धनंजय कुमार के जरिए कोर्ट में BNNS की धारा 173(4) के तहत एक प्रार्थना पत्र दिया था।
पीड़ित के मुताबिक, हरतीरथ चौराहे पर उनकी तीन बेशकीमती दुकानें हैं, जो उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन हैं। इन दुकानों में एक जनरल स्टोर है। दूसरी दुकान में चाय और दही-मलाई का काम होता है। तीसरी दुकान में वेल्डिंग मटेरियल, सीमेंट आदि का व्यवसाय है।
आरोप है कि इन कीमती दुकानों में से एक पर विपक्षीगण जबरदस्ती कब्जा करना चाहते थे। कुछ समय पहले आरोपी उमेश सिंह और मुकेश सिंह ने मुकुंद यादव से दुकान की मांग की थी। जब व्यवसायी ने अपनी पुश्तैनी दुकान देने से साफ इनकार कर दिया, तो आरोपी आगबबूला हो गए और देख लेने की धमकी दी।
घर में घुसकर हमला, 1.50 लाख की लूटपाट और तोड़फोड़ – अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, अपनी इसी रंजिश और मंशा को पूरा करने के लिए 18 मार्च 2026 की शाम करीब 4 बजे उमेश सिंह, मुकेश सिंह और कुणाल सिंह उर्फ गोलू अपने हिंदू युवा वाहिनी के 12 से 15 अज्ञात साथियों के साथ हरतीरथ स्थित मकान में जबरदस्ती घुस आए।
पीड़ित का आरोप: “आरोपियों ने घर के अंदर रखे वेल्डिंग मटेरियल और अन्य सामानों को तोड़ना-फोड़ना शुरू कर दिया। जब हमने इसका विरोध किया, तो उन्होंने मुझ पर और मेरे परिवार पर जानलेवा हमला कर दिया, जिससे मुझे गंभीर चोटें आईं। इस हमले में लगभग 1.50 लाख रुपये का नुकसान हुआ और आरोपी दुकान में रखा कीमती सामान भी लूट ले गए।”
इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पीड़ित मुकुंद यादव का कहना है कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी थी, लेकिन पुलिस ने उनकी कोई सुनवाई नहीं की और प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने से मना कर दिया।
इसके विपरीत, आरोप है कि पुलिस ने कथित रूप से हिंदू युवा वाहिनी के राजनीतिक दबाव में आकर 25 मार्च 2026 को आरोपियों की तरफ से एक मनगढ़ंत प्रार्थना पत्र लिया और उल्टा पीड़ित व्यवसायी मुकुंद यादव के खिलाफ ही विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया। जब स्थानीय पुलिस से न्याय की कोई उम्मीद नहीं बची, तब पीड़ित ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
अदालत ने पत्रावली देखकर दिया FIR का आदेश – सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पत्रावली पर उपलब्ध सभी साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट और दलीलों को बेहद गंभीरता से लिया। प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने माना कि मामला गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके बाद अदालत ने सीधे तौर पर कोतवाली पुलिस को आदेश दिया कि वाराणसी में हिंदू युवा वाहिनी पर मुकदमा दर्ज कर कानून के मुताबिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। व्यापारी वर्ग इस फैसले को न्याय की जीत मान रहा है, जबकि पुलिस अब कोर्ट के आदेश के अनुपालन में आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुट गई है।





