NEET Paper Leak Protest के दौरान जंतर-मंतर पर भोजन का प्रबंध करने वाले कानून के छात्र जुनैद ने पुलिस पर अवैध हिरासत का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। जानिए क्या है पूरा मामला।
विशेष संवाद
NEET Paper Leak Protest के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर चले 37 दिवसीय छात्र आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले कानून के छात्र जुनैद अब इंसाफ के लिए देश की सबसे बड़ी अदालत पहुंचे हैं। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था संभालने वाले जुनैद ने उत्तर प्रदेश पुलिस और जांच एजेंसियों पर बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के अवैध हिरासत में रखने और मानसिक-शारीरिक उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है।
असोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) के सहयोग से जुनैद ने मंगलवार को भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में एक याचिका दाखिल की है। इस याचिका में उन्होंने अपने तथा अपने परिवार के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या उत्पीड़नत्मक कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाने और पूरे मामले की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच कराने की गुहार लगाई है।

20 जून से NEET Paper Leak Protest में थे सक्रिय = जुनैद के अनुसार, वे 20 जून से जंतर-मंतर पर NEET Paper Leak Protest स्थल पर लगातार मौजूद थे और स्वयंसेवकों (Volunteers) के साथ मिलकर दूर-दराज से आए प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए भोजन और पीने के पानी के प्रबंध में लगे हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी सेवाभाव के बीच उन्हें और उनके एक साथी को जबरन एक वाहन में बैठाया गया। उनकी आंखों पर पट्टी बांधी गई और मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए। इसके बाद उन्हें एक अज्ञात स्थान पर ले जाकर रातभर प्रताड़ित किया गया और तरह-तरह के सवाल पूछे गए।
फंडिंग और भोजन व्यवस्था पर पूछे गए सवाल = पूछताछ के दौरान पुलिस अधिकारियों ने मुख्य रूप से फंडिंग को लेकर सवाल दागे। उनसे पूछा गया कि वे रोजाना गाजियाबाद से जंतर-मंतर क्यों आते हैं और इस पूरी व्यवस्था व लंगर का खर्च कहां से आ रहा है। इस पर जुनैद ने अपना रुख साफ करते हुए बताया कि उन्होंने NEET Paper Leak Protest के दौरान किसी भी प्रकार की नकद राशि, व्यक्तिगत ऑनलाइन फंडिंग या QR कोड जारी नहीं किया था। प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन मुख्य रूप से ऑनलाइन डिलीवरी, किसान संगठनों के सहयोग और गुरुद्वारों के लंगर के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा था।
घंटों घुमाने के बाद देहरादून के पास छोड़ा, परिजनों को भी परेशान करने का आरोप = जुनैद का दावा है कि रातभर पूछताछ करने के बाद उन्हें घंटों तक गाड़ी में घुमाया गया और अंततः उत्तराखंड के देहरादून के समीप ले जाकर छोड़ दिया गया। अपने इन दावों को सही साबित करने के लिए जुनैद के पास दिल्ली लौटने का कैब बिल, राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल की पर्ची और संबंधित क्षेत्र के पुलिस स्टेशन की तस्वीरें बतौर ठोस सबूत मौजूद हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने उनके निर्दोष परिजनों को भी थाने ले जाकर बेवजह परेशान किया और दबाव बनाने की कोशिश की।
पुलिस का पक्ष: हिरासत की बात से इनकार = वहीं दूसरी ओर, गाजियाबाद पुलिस ने जुनैद के परिजनों से बातचीत की बात तो स्वीकार की है, लेकिन किसी भी प्रकार की आधिकारिक ‘हिरासत’ (Custody) से साफ इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा इनपुट्स के तहत केवल सामान्य पूछताछ की गई थी और किसी को भी अवैध रूप से नहीं रखा गया।
सुप्रीम कोर्ट से जुनैद ने मांगी ये दो प्रमुख राहतें = APCR की ओर से दाखिल याचिका में कानून के छात्र जुनैद ने शीर्ष अदालत से मुख्य रूप से निम्नलिखित राहतों की मांग की है : निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच (Independent Inquiry): बिना किसी वैधानिक नोटिस या तय कानूनी प्रक्रिया के अवैध हिरासत में रखने और उत्पीड़न के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण (Protection from Coercive Action): जुनैद और उनके परिवार के खिलाफ भविष्य में किसी भी प्रकार की पुलिसिया कार्रवाई या उत्पीड़न पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। जुनैद ने सुप्रीम कोर्ट में सौंपे अपने हलफनामे (Affidavit) में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि उनका या उनके परिवार का कभी कोई आपराधिक इतिहास (Criminal Record) नहीं रहा है।
“छात्रों के अधिकारों के लिए निडर होकर उठाते रहेंगे आवाज” = NEET Paper Leak Protest के संदर्भ में बात करते हुए कानून की पढ़ाई कर रहे जुनैद ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उन्हें संतोष है कि देश के छात्रों की जायज आवाज सुनी गई। उन्होंने अपना इरादा जाहिर करते हुए कहा कि वे इस तरह के पुलिसिया दबाव से डरने वाले नहीं हैं और भविष्य में भी शिक्षा व्यवस्था तथा छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े आंदोलनों में पूरी निडरता के साथ अपनी आवाज उठाते रहेंगे।



