अभियुक्त की तरफ से न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता हिमांचल सिंह, प्रवीण कुमार गौतम व चन्द्र किरण भारती ने पक्ष रखा
वाराणसी। सत्र न्यायालय द्वारा एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया गया है। धारा 137 (2) और 87 बी०एन०एस० (BNS) के तहत थाना फूलपुर, वाराणसी में दर्ज अपराध संख्या 249/2026 के मामले में अभियुक्त अलगू सरोज को न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अलगू सरोज का जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया है।
क्या है पूरा मामला? = वादी विनोद यादव की 14 वर्षीय पुत्री दिनांक 06 अगस्त 2026 को दोपहर लगभग 1:30 बजे अपने पिता को खाना देकर घर वापस लौटी थी। इसके लगभग आधे घंटे बाद वह टिफिन लेने दुकान गई, लेकिन वापस नहीं लौटी। काफी खोजबीन के बाद भी जब उसका कुछ पता नहीं चला, तो पुलिस में मामला दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान पीड़िता का बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 183 बी०एन०एस०एस० के अंतर्गत दर्ज कराया गया। इसके बाद पुलिस ने आगे की कानूनी कार्रवाई पूरी की।
अभियुक्त और अभियोजन पक्ष के तर्क = अभियुक्त पक्ष की दलीलें: अभियुक्त की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता हिमांचल सिंह, प्रवीण कुमार गौतम व चन्द्र किरण भारती ने अपना पक्ष रखते हुये न्यायालय में कहा गया कि अलगू सरोज (निवासी – सेउर, औराई, भदोही) की ओर से प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्र में कहा गया कि वह पूरी तरह निर्दोष है और उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। वह नामित अभियुक्त नहीं है, उसकी उम्र मात्र 19 वर्ष है और उसका कोई भी आपराधिक इतिहास नहीं रहा है। अभियुक्त 15 अगस्त 2026 से जिला कारागार में निरूद्ध है।

अभियोजन पक्ष की आपत्तियां: जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) और वादी के अधिवक्ता ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि अभियुक्त द्वारा नाबालिग पीड़िता को बहला-फुसलाकर उसका अपहरण किया गया है। हालांकि, पीड़िता ने अपने धारा 183 बी०एन०एस०एस० के बयान में स्पष्ट किया कि वह अलगू के साथ मुंबई गई थी, लेकिन उसने यह भी कहा कि उनके बीच किसी प्रकार का शारीरिक संबंध नहीं बना है और वह अब घर वापस आना चाहती है।
न्यायालय का निर्णय और शर्तें = मामले के समस्त तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों को गंभीरता से दृष्टिगत रखते हुए, न्यायालय ने गुणदोष पर कोई टिप्पणी किए बिना अभियुक्त अलगू सरोज का जमानत प्रार्थना पत्र मंजूर कर लिया है। न्यायालय के आदेशानुसार अभियुक्त को निम्नलिखित शर्तों प्रार्थी/अभियुक्त अलगू सरोज को 50,000/- (पचास हजार रुपये) का व्यक्तिगत बंधपत्र एवं समान धनराशि की दो प्रतिभूतियां संबंधित न्यायालय की संतुष्टि पर दाखिल करनी होंगी। अभियुक्त विचारण में पूरा सहयोग करेगा और प्रत्येक तिथि पर न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेगा। अभियुक्त किसी भी साक्षी को प्रलोभित या प्रभावित नहीं करेगा। अपना स्थायी या अस्थायी पता बदलने पर न्यायालय को तुरंत सूचना देनी होगी। अभियुक्त भविष्य में किसी भी प्रकार के अपराध में संलिप्त नहीं होगा और न्यायालय की अनुमति के बिना देश छोड़कर विदेश नहीं जाएगा के अधीन रिहा किया जाएगा। यदि अभियुक्त इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है, तो अभियोजन पक्ष उसकी जमानत निरस्त कराने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होगा।


