वाराणसी। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की गई हिंसक भाषा को लेकर कानूनी और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पीएम मोदी के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी पर अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है।
ई-मेल के जरिए दिल्ली पुलिस और एलजी से शिकायत = भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ (काशी क्षेत्र) के संयोजक और दी बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शशांक शेखर त्रिपाठी ने 9 अगस्त 2026 को ई-मेल के जरिए यह आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। ई-मेल में दिल्ली पुलिस आयुक्त के साथ-साथ दिल्ली के उपराज्यपाल और दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय को भी प्रतिलिपि भेजी गई है।

क्या है पूरा मामला? = शिकायत का मुख्य आधार इंस्टाग्राम (Instagram) पर प्रसारित एक रील है, जिसमें कथित तौर पर “CJP के लोग सड़क पर मोदी को ठोकने आए थे” जैसे वाक्य का प्रयोग किया गया है। आपराधिक जांच की मांग: अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी के अनुसार ‘ठोकने’ शब्द का इस्तेमाल शारीरिक हिंसा, गंभीर चोट या जान से मारने की धमकी के अर्थ में हुआ है, जो बेहद गंभीर सुरक्षा मामला है। डिजिटल फॉरेंसिक जांच: रील के मूल अपलोडर, वक्ता, ऑडियो, एडिटिंग, मेटाडाटा और सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित कर उनकी फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की गई है। राजनीतिक संलिप्तता का संदेह: शिकायत में अरविंद केजरीवाल या किसी अन्य राजनीतिक व्यक्ति की भूमिका, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष समर्थन, उकसावे या पूर्व नियोजित साजिश के बिंदु पर भी निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय से एक्शन की शुरुआत = शिकायत मिलने के बाद दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय ने 9 अगस्त 2026 को ही इस मामले को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद (Ashish Sood) के कार्यालय को अग्रेषित कर दिया है।
पीएम मोदी के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी पर अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी का स्पष्ट कहना है कि यह केवल एक वायरल बयान का मामला नहीं है, बल्कि देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़ा सवाल है। यदि जांच में किसी की आपराधिक संलिप्तता या षड्यंत्र के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।



