वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद से एक महत्वपूर्ण न्यायिक अपडेट सामने आया है। वाराणसी की विशेष अदालत (पॉक्सो एक्ट) ने एक अहम फैसला सुनाते हुए अभियुक्त उपेन्द्र प्रसाद उर्फ नाटे को अग्रिम जमानत दे दी है। यह मामला थाना चौबेपुर से जुड़ा हुआ है, जिसमें अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। आइए जानते हैं इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी bmbreakingnews.com पर।

क्या है पूरा मामला?= यह पूरा मामला वाराणसी जिले के थाना चौबेपुर क्षेत्र का है। वादिनी मुकदमा (पीड़िता की मां) की ओर से थाने में एक लिखित तहरीर दी गई थी। तहरीर के अनुसार, घटना 22 जुलाई 2025 को शाम 4 से 5 बजे के बीच की बताई गई है। आरोप लगाया गया था कि गांव के ही रहने वाले उपेन्द्र प्रसाद उर्फ नाटे पुत्र शोभनाथ ने लगभग 10 वर्षीय पीड़िता को अपने घर में ले जाकर छेड़खानी की। जब पीड़िता ने शोर मचाया, तो परिजन खेत से मौके पर पहुंचे। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा संख्या 491/2025, धारा 74, 333 BNS और धारा 7/8 पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की थी।

अदालत में अभियुक्त पक्ष की दलीलें = न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या- 07 / विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) कोर्ट संख्या 01, वाराणसी के समक्ष अभियुक्त उपेन्द्र प्रसाद उर्फ नाटे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हिमांचल सिंह ने अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया।

अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता ने अदालत में निम्नलिखित मुख्य तर्क रखे जिसमे प्रथम आवेदन: यह प्रार्थी/अभियुक्त का इस मामले में पहला अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र है। इसके अलावा किसी अन्य उच्च न्यायालय या निचली अदालत में कोई याचिका लंबित नहीं है। निर्दोषिता का दावा: अभियुक्त मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता है और उसे इस घटना में झूठा फंसाया गया है। प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) काफी विलम्ब से दर्ज कराई गई है, जिसका कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। बयानों में विरोधाभास: पीड़िता द्वारा विवेचक को दिए गए धारा 161 (180 BNSS) और धारा 164 (183 BNSS) के बयानों में काफी विरोधाभास है, जिससे पूरी घटना संदिग्ध प्रतीत होती है। विवेचना में सहयोग: विवेचना पहले ही पूरी हो चुकी है और संबंधित न्यायालय में आरोप-पत्र (Charge Sheet) दाखिल किया जा चुका है।

विशेष लोक अभियोजक का विरोध और न्यायालय का निर्णय = विद्वान विशेष लोक अभियोजन पक्ष द्वारा अभियुक्त के जमानत प्रार्थना पत्र का कड़ा विरोध किया गया और इसे खारिज करने की मांग की गई। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को ध्यान से सुना, थाने से प्राप्त आख्या (Report) और पत्रावली पर उपलब्ध सभी दस्तावेजों का बारीकी से परिशीलन किया। अदालत ने पाया कि इस मामले में विवेचना पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। अभियुक्त पर जिन धाराओं में आरोप लगाए गए हैं, उनमें अधिकतम सजा 7 वर्ष तक की है। लगाए गए आरोप साक्ष्य का विषय हैं, जिनका परीक्षण विचारण (Trial) के दौरान किया जाएगा। इन सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने बिना गुण-दोष पर गहरी टिप्पणी किए अभियुक्त को राहत देने का आधार पर्याप्त माना।

अदालत की शर्तें और अग्रिम जमानत मंजूर = न्यायालय ने अभियुक्त उपेन्द्र प्रसाद उर्फ नाटे की ओर से प्रस्तुत अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र संख्या 3252/2026 को स्वीकार कर लिया है। अदालत ने आदेश दिया कि अभियुक्त 50,000 रुपये की दो जमानतें और इतनी ही धनराशि का व्यक्तिगत बंधपत्र (Personal Bond) प्रस्तुत करे, जिसके बाद उसे निम्नलिखित शर्तों पर रिहा किया जाए जिसमे अभियुक्त समान प्रकार के अपराध की पुनरावृत्ति नहीं करेगा। अभियुक्त मामले से संबंधित साक्षियों (Witnesses) को किसी भी तरह से प्रभावित या आतंकित नहीं करेगा। अभियुक्त मामले के विचारण (Trial) में पूरा सहयोग करेगा और बिना वजह स्थगन (Adjournment) नहीं मांगेगा। अभियुक्त न्यायालय की अनुमति के बिना देश छोड़कर नहीं जाएगा। प्रार्थी/अभियुक्त विचारण के दौरान प्रत्येक तारीख पर न्यायालय में उपस्थित रहेगा।

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