वाराणसी में उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की सदर उपशाखा के अध्यक्ष अमन सिंह के नेतृत्व में लंबित मांगों को लेकर शासन के खिलाफ आवाज उठाई गई है। कार्यभार और संसाधनों की कमी पर क्या बोले अमन सिंह? पढ़ें bmbreakingnews.com पर।
वाराणसी: उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की सदर, वाराणसी उपशाखा ने लेखपालों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर शासन और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। वाराणसी लेखपाल संघ अमन सिंह के नेतृत्व में शासन स्तर पर प्रभावी कार्रवाई न होने पर गंभीर नाराजगी जताई गई है। संघ का कहना है कि लगातार बढ़ते कार्यभार और संसाधनों की भारी कमी के कारण मैदानी स्तर पर काम करना मुश्किल होता जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद उनकी समस्याओं पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हो रही है।
लेखपाल संघ सदर अध्यक्ष अमन सिंह की ओर से सामने आए इस पत्र के माध्यम से शासन को बताया गया है कि लेखपालों पर प्रशासनिक कार्यों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। अतिरिक्त कार्यभार और छुट्टियां: शासन की ओर से अवकाश के दिनों में भी लगातार ड्यूटी लगाए जाने की बात कही गई है, जिससे कर्मचारियों का मानसिक और शारीरिक शोषण हो रहा है। प्रमुख जिम्मेदारियां: लेखपालों पर जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, राजस्व अभिलेखों के अद्यतन, वरासत, नामांतरण, पैमाइश, ई-गवर्नेंस, आपदा प्रबंधन और कानून-व्यवस्था जैसे तमाम महत्वपूर्ण कार्यों का जिम्मा होता है। साधनों की कमी: जमीनी स्तर पर कार्य करने के लिए आवश्यक आधुनिक संसाधनों और उपकरणों की भारी कमी है, जिसके चलते कार्यों के निष्पादन में बाधा आती है।

वाराणसी तहसील सदर के लेखपालों का कहना है कि उनकी वर्षों पुरानी न्यायोचित मांगें आज भी कागजों में ही दबी हुई हैं। शासन स्तर पर लंबे समय से लंबित पदोन्नति (Promotion) और वेतन विसंगति (Pay Disparity) के मामलों का निस्तारण न होने से कैडर में भारी निराशा है। इस संबंध में 22 सितंबर 2026 को जारी पत्र में 2 अगस्त 2026 के कार्यवृत्त का भी विशेष संदर्भ दिया गया है। संघ का स्पष्ट आरोप है कि बार-बार मांग उठाने के बाद भी शासन स्तर से कोई प्रभावी और सकारात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है।
वाराणसी लेखपाल संघ अमन सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शासन स्तर पर उनकी लंबित मांगों, पदोन्नति और कार्यभार के पुनरीक्षण पर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो लेखपाल संघ कड़ा रुख अपनाने पर मजबूर होगा। संघ ने एक बार फिर से शासन-प्रशासन को जगाने का प्रयास किया है ताकि मैदानी कर्मचारियों को उनका अधिकार और उचित सम्मान मिल सके।


