अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव ‘गुड्डू’ और नरेश यादव ने पक्ष रखा।
उत्तर प्रदेश के धार्मिक और राजनीतिक केंद्र वाराणसी से एक बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। वाराणसी दुष्कर्म मामला (Varanasi Rape Case) में विशेष अदालत ने डीएलडब्ल्यू (डीरेका) के एक रेलकर्मी को बड़ी राहत देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
अ अपर जिला जज (सप्तम) विकास श्रीवास्तव की अदालत ने सुनवाई के दौरान पर्याप्त साक्ष्य और आरोप सिद्ध न होने पर संदेह का लाभ देते हुए आरोपी रेलकर्मी जितेंद्र कुमार राही को दोषमुक्त कर दिया। इस वाराणसी दुष्कर्म मामला में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने जोरदार पैरवी की, जिसके बाद कोर्ट का यह अहम फैसला आया है। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव ‘गुड्डू’ और नरेश यादव एडवोकेट ने अपना पक्ष मजबूती से रखा था।

7-8 साल से शादी का झांसा देने का था आरोप = इस चर्चित वाराणसी दुष्कर्म मामला की शुरुआत तब हुई थी जब पीड़िता ने 23 सितंबर 2020 को पुलिस अधीक्षक को एक प्रार्थना पत्र दिया था। पीड़िता के अनुसार, ठठरा मिर्जामुराद निवासी जितेंद्र कुमार राही उसके भाई का दोस्त था और अक्सर गांव में क्रिकेट खेलने आता था। वर्तमान में वह रेलवे में ग्रुप डी के पद पर कार्यरत है।
पीड़िता का आरोप था कि जब वह 17 वर्ष की थी, तब से आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ लगातार शारीरिक संबंध बनाए। आरोप यह भी था कि 20 अगस्त 2020 की रात आरोपी ने उसके घर आकर फिर से दुष्कर्म किया। जब पीड़िता ने शादी का दबाव बनाया तो आरोपी ने कथित तौर पर गाली-गलौज की, शादी से इनकार कर दिया और जान से मारने की धमकी दी। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने 13 अक्टूबर 2020 को मुकदमा दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया था।
सबूतों और गवाहों के आधार पर अदालत का फैसला = वाराणसी दुष्कर्म मामला की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष की ओर से पीड़िता समेत कुल 5 गवाहों को परीक्षित कराया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन करने के बाद अदालत इस नतीजे पर पहुंची कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश करने में असमर्थ रहा।
पर्याप्त सबूत और आरोप सिद्ध न होने के कारण अदालत ने डीरेका कर्मी जितेंद्र कुमार राही को वाराणसी दुष्कर्म मामला से पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया। इस फैसले के बाद आरोपी पक्ष ने राहत की सांस ली है, वहीं कानूनी गलियारों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।


