सुनवाई के दौरान आवेदक/अभियुक्त के अधिवक्ता ऋषभ मिश्रा, श्रीश प्रताप सिंह व हिमांशु त्रिपाठी ने पक्ष रखा।
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले की एक स्थानीय अदालत से पारिवारिक विवाद और मारपीट के मामले में नामजद एक आरोपी को बड़ी राहत मिली है। न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष सं0-13/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट, वाराणसी की अदालत ने सारनाथ थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर (आशापुर) निवासी प्रकाश पुत्र स्व. प्रेमचन्द की अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है। अदालत ने केस की परिस्थितियों और कानूनी नजीरों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को सशर्त अग्रिम जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादिनी शीला देवी ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि 24 मई 2026 की सुबह उनके जेठ प्रकाश चन्द्र, जेठानी भारती देवी और परिवार के अन्य सदस्यों (अभिनाश, अनन्त, अतुल व गुन्जा देवी) ने लाठी-डंडों से उन पर और उनके बच्चों पर हमला कर दिया। इस मारपीट में शीला देवी के गले और जबड़े में गंभीर चोटें आईं और उनकी पुत्री प्राची के बाएं हाथ की उंगली फ्रैक्चर हो गई। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।
कोर्ट में बचाव पक्ष की दलीलें – सुनवाई के दौरान आवेदक/अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता ऋषभ मिश्रा, श्रीश प्रताप सिंह व हिमांशु त्रिपाठी ने न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष सं0-13/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट, वाराणसी के समक्ष दलील दी कि उनके मुवक्किल को पारिवारिक रंजिश के कारण झूठी कहानी बनाकर इस मामले में फर्जी फंसाया गया है। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि : कथित घटना के एक वर्ष पूर्व आरोपी का लीवर का बड़ा ऑपरेशन हुआ था, जिसके कारण वह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहा है और दैनिक कार्यों के लिए भी दूसरों पर निर्भर है। ऐसे में उसके द्वारा मारपीट जैसी घटना को अंजाम देना संभव नहीं है। घटना 24 मई 2026 की बताई जा रही है, जबकि एफआईआर करीब 9 दिन की देरी से 1 जून 2026 को दर्ज कराई गई, जिसका कोई ठोस कारण नहीं दिया गया। मामले में आरोपी का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है और कथित चोटों की कोई पुख्ता एक्स-रे या मेडिकल रिपोर्ट भी पेश नहीं की गई है।
कोर्ट का फैसला और कानूनी आधार – हालांकि, सरकारी वकील (विद्वान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी) ने इस अग्रिम जमानत का कड़ा विरोध किया और याचिका को खारिज करने की मांग की।
दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और केस डायरी का बारीकी से अवलोकन करने के बाद न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष सं0-13/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट, वाराणसी ने पाया कि मामले में एफआईआर काफी विलंब से दर्ज हुई है और आरोपी के खिलाफ कोई आपराधिक इतिहास भी मौजूद नहीं है। इसके अलावा, जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज है, उनमें 7 साल से कम की सजा का प्रावधान है।
माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सत्येन्द्र कुमार अंतिल बनाम सी.बी.आई. मामले में प्रतिपादित कानूनी व्यवस्था का हवाला देते हुए अदालत ने माना कि आरोपी को अग्रिम जमानत देने का पर्याप्त आधार है।
न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष सं0-13/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट, वाराणसी ने आरोपी प्रकाश की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने की स्थिति में, आरोपी को 50-50 हजार रुपये के दो प्रतिभूतियों (जमानती) और व्यक्तिगत बंधपत्र (Personal Bond) तथा आवश्यक अंडरटेकिंग प्रस्तुत करने पर अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए।




