वाराणसी: देश में डिजिटल क्रांति के साथ-साथ साइबर अपराध का ग्राफ भी तेजी से बढ़ रहा है। साइबर ठगों के इसी नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए कमिश्नरेट वाराणसी पुलिस एक्शन मोड में आ गई है। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल और संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) आलोक प्रियदर्शी के कड़े निर्देशन में वाराणसी पुलिस ‘ऑपरेशन म्यूल स्ट्राइक’ चला रही है। इस महाअभियान के तहत वाराणसी साइबर क्राइम सेल और विभिन्न थानों की साइबर टीमों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए फर्जी म्यूल बैंक अकाउंट (Mule Accounts) धारकों के खिलाफ बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। पुलिस ने इस मामले में 6 अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
क्या है वाराणसी पुलिस ‘ऑपरेशन म्यूल स्ट्राइक’? = साइबर अपराधी आम लोगों को चूना लगाने के लिए बेहद शातिर और संगठित तरीका अपनाते हैं। गृह मंत्रालय द्वारा संचालित ’14C’ और एनसीआरपी (NCRP) पोर्टल से मिली संदिग्ध खातों की सूची के बाद डीसीपी अपराध नीतू कात्यान, एडीसीपी अपराध नृपेन्द्र और एसीपी साइबर क्राइम विदुष सक्सेना के नेतृत्व में एक विशेष रणनीति तैयार की गई। इस रणनीति को वाराणसी पुलिस ‘ऑपरेशन म्यूल स्ट्राइक’ का नाम दिया गया। इसके तहत उन स्थानीय लोगों को टारगेट किया जा रहा है, जो चंद रुपयों के लालच में आकर साइबर अपराधियों को अपना म्यूल बैंक अकाउंट किराए पर देते हैं या बेच देते हैं।
5 बैंक खातों से ₹2.42 करोड़ का फ्रॉड, 51 शिकायतें दर्ज = पुलिस की इस कार्रवाई में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। पकड़े गए आरोपियों के सिर्फ 5 म्यूल बैंक अकाउंट के जरिए कुल ₹2,42,89,752/- (दो करोड़ बयालीस लाख रुपये से अधिक) की ठगी को अंजाम दिया जा चुका है। इन खातों के खिलाफ नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर 51 शिकायतें पहले से दर्ज थीं।
गिरफ्तार अभियुक्तों और थानों की कार्रवाई का विवरण:
| क्र०सं० | थाना | मु०अ०सं० व धारा | अभियुक्त का विवरण | कुल फ्रॉड राशि | कुल होल्ड राशि | NCRP शिकायतें |
| 1 | भेलूपुर | 367/2026 धारा 318(4) BNS | मो० उनैश (बजरडीहा, वाराणसी) | ₹2,19,27,152 | ₹2,03,30,000 | 43 |
| 2 | सिगरा | 262/2026 धारा 318(4) BNS | अजीत कुमार पटेल (रोहनिया, वाराणसी) | ₹22,00,000 | ₹6,00,000 | 1 |
| 3 | चेतगंज | 154/2026 धारा 318(4), 49 BNS | आरिफ जमाल (जैतपुरा, वाराणसी) | ₹1,08,299 | ₹0 | 2 |
| 4 | चोलापुर | 247/2026 धारा 318(2), 319(2) BNS, 66C, 66D IT Act | 1. शीष कुमार गौड़ 2. सिखयम यादव 3. शुभम सिंह (दशवतपुर, चोलापुर) | ₹54,301 | ₹9,511 | 5 |
नोट: पुलिस ने बताया कि इन खातों के अलावा अभी कुल 32 अन्य संदिग्ध खातों की गहन जांच चल रही है, जिससे इस रैकेट में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
सर्वसाधारण की भाषा में समझें तो म्यूल बैंक अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसका इस्तेमाल साइबर ठग अवैध रूप से लूटी गई रकम (Fraud Money) को छिपाने, ट्रांसफर करने या ठिकाने लगाने के लिए करते हैं।
साइबर ठग कैसे करते हैं इसका इस्तेमाल? = झांसा और लालच: ठग सीधे अपने बैंक खाते का इस्तेमाल नहीं करते। वे किसी गरीब, छात्र या लालची व्यक्ति को नौकरी, कमीशन या लॉटरी का झांसा देकर उसका म्यूल बैंक अकाउंट और उसकी किट (एटीएम, चेकबुक, नेट बैंकिंग पासवर्ड) अपने कब्जे में ले लेते हैं। पैसों की हेराफेरी: डिजिटल अरेस्ट, पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड या निवेश के नाम पर पीड़ितों से लूटा गया पैसा सीधे इसी म्यूल बैंक अकाउंट में मंगाया जाता है। जांच भटकाना: पुलिस या जांच एजेंसियां असली अपराधी तक न पहुंच सकें, इसलिए पैसे को एक खाते से दूसरे खाते में कई बार घुमाया जाता है और अंत में एटीएम या यूपीआई के जरिए कैश निकाल लिया जाता है।
मूल खाताधारकों की ये गलतियां सीधे पहुंचाती हैं जेल = वाराणसी पुलिस ने चेतावनी दी है कि यदि आप अपने बैंक खाते की जानकारी किसी अजनबी से साझा करते हैं, तो आप भी सह-अपराधी माने जाएंगे। इन खाताधारकों की मुख्य भूमिकाएं ये होती हैं : कमीशन या चंद रुपयों के लालच में अपना निजी बैंक खाता किसी को सौंपना। अपनी पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स को दूसरों को देना। फर्जी दस्तावेजों पर या किराए के खातों का संचालन करना।
इस बड़े ऑपरेशन को सफल बनाने में वाराणसी कमिश्नरेट की इन टीमों की मुख्य भूमिका रही : साइबर सेल टीम: इंस्पेक्टर मनोज कुमार तिवारी, सब-इंस्पेक्टर अजय कुमार पाण्डेय, हरिकेश यादव, कृष्ण कुमार, दयाशंकर यादव, और कांस्टेबल विराट सिंह, आदर्श आनंद सिंह, अंकित कुमार गुप्ता, रविश राय, शिव बाबू व सुनील। थाना सिगरा: सब-इंस्पेक्टर भरत भट्ट, महिला सब-इंस्पेक्टर काजोल सिंह। थाना भेलूपुर: सब-इंस्पेक्टर संदीप सिंह, कांस्टेबल विवेकानंद शर्मा। थाना चेतगंज: सब-इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार सिंह, कांस्टेबल अनिल कुमार। थाना चोलापुर: सब-इंस्पेक्टर राहुल कुमार यादव, कांस्टेबल विकास कुमार।




