अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी, अनुज यादव और आदित्य वर्मा ने मजबूती से अपना पक्ष रखा

वाराणसी। उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी काशी से इस वक्त एक बड़ी कानूनी खबर सामने आ रही है। वाराणसी आईपीएल सट्टा (Varanasi IPL Satta) नेटवर्क चलाने और करोड़ों रुपए की ऑनलाइन सट्टेबाजी करने के मामले में गिरफ्तार किए गए 11 आरोपियों को अदालत से बहुत बड़ी राहत मिल गई है। जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सभी 11 आरोपियों की जमानत मंजूर कर ली है।

50-50 हजार के मुचलके पर रिहाई का आदेश = अदालत ने मामले की गंभीरता और वकीलों की दलीलों को देखते हुए आरोपी रवि यादव, अर्पित तिवारी, विकास पटेल, जिया उल हक, सचिन सिंह, गौरव चौहान, देवेश चौहान, अनिकेत तिवारी, अमित तिवारी, सौरभ चौहान और राहुल मौर्या को राहत दी। माननीय जज ने इन सभी को 50-50 हजार रुपए की दो जमानतें और समान राशि का बंधपत्र (बॉन्ड) जमा करने पर जेल से रिहा करने का आदेश जारी किया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी, अनुज यादव और आदित्य वर्मा ने मजबूती से अपना पक्ष रखा और आरोपियों को बेल दिलाने में कामयाब रहे।

क्या था पूरा मामला? (The Background) = अगर इस वाराणसी आईपीएल सट्टा मामले के फ्लैशबैक में जाएं, तो इसकी शुरुआत इसी महीने की पहली तारीख को हुई थी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 1 जून 2026 को कैंट थाने के उपनिरीक्षक गौरव कुमार सिंह को एक पुख्ता मुखबिर से सूचना मिली थी। सूचना यह थी कि महावीर मंदिर के पास, टकटकपुर की गली में स्थित ‘सिद्धी हाईट्स’ के बेसमेंट में बड़े पैमाने पर ऑनलाइन आईपीएल मैच पर सट्टा खेला और खिलवाया जा रहा है।

सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने बिना वक्त गंवाए मौके पर छापेमारी की। इस रेड के दौरान पुलिस ने बेसमेंट से 11 युवकों को रंगे हाथों दबोच लिया। पूछताछ में इनकी पहचान रवि यादव, अर्पित तिवारी, विकास पटेल समेत अन्य आरोपियों के रूप में हुई।

डिजिटल मार्केटिंग की आड़ में चल रहा था ‘सट्टे का खेल’ = पुलिस पूछताछ में जो खुलासा हुआ, वह बेहद चौंकाने वाला था। पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि वे लोग ‘आरडी डिजिटल’ (RD Digital) नाम से एक एड एजेंसी चलाते थे। इस एजेंसी का आधिकारिक काम तो विभिन्न कंपनियों, फर्मों और वेबसाइट्स से संपर्क कर उनका ऑनलाइन प्रमोशन करना था।

कैसे होता था खेल? आरोपी इसी डिजिटल मार्केटिंग की आड़ में विभिन्न Betting (सट्टेबाजी) वेबसाइट्स के लिंक तैयार करते थे। इन लिंक्स को अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किया जाता था। जब लोग इन लिंक्स पर जाकर रजिस्टर करते, तो आरोपी उन्हें फर्जी आईडी बेचकर वाराणसी आईपीएल सट्टा मार्केट में सट्टेबाजी करवाते थे।

इतना ही नहीं, आरोपियों ने फर्जी नाम और पते पर दर्जनों फेसबुक पेज और फेक प्रोफाइल्स बना रखी थीं, जो उनके लैपटॉप और मोबाइल में लॉग-इन थीं। इन्हीं का इस्तेमाल करके पूरा सिंडिकेट ऑपरेट हो रहा था।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से सट्टेबाजी में इस्तेमाल होने वाले गैजेट्स बरामद किए थे, जिनमें 10 अदद लैपटॉप, 17 अदद मोबाइल फोन, 1350 रुपये नगद शामिल थे।

इस बरामदगी के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ धोखाधड़ी, आईटी एक्ट और जुआ अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया था। लेकिन अब, करीब तीन हफ्ते बाद इस वाराणसी आईपीएल सट्टा केस के सभी आरोपियों को कोर्ट से बेल मिल गई है।

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