वाराणसी। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और साइबर फ्रॉड करने वाले अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने अपना शिकंजा कस दिया है। साइबर क्राइम थाना, कमिश्नरेट वाराणसी द्वारा ऑनलाइन बेटिंग और सट्टेबाजी के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के क्रम में पुलिस टीम को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने वाराणसी के जगतगंज इलाके में दबिश देकर ऑनलाइन सट्टेबाजी और सोशल मीडिया हैकिंग के खेल को संचालित करने वाले दो शातिर अभियुक्तों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह पूरी कार्रवाई साइबर क्राइम थाना, कमिश्नरेट वाराणसी की मुस्तैद टीम द्वारा तकनीकी विश्लेषण और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के आधार पर की गई है।

कैसे शुरू हुई जांच और कैसे हुआ भंडाफोड़? = मामले का खुलासा तब हुआ जब बीते 24 जून 2026 को साइबर क्राइम थाना, कमिश्नरेट वाराणसी द्वारा ‘प्रतिबिम्ब’ पोर्टल पर प्रदर्शित एक संदिग्ध मोबाइल नंबर (8756263270) की जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस को एक साइबर शिकायत मिली, जिसमें पीड़ित व्यक्ति की इंस्टाग्राम आईडी हैक कर क्यूआर कोड के माध्यम से अवैध रूप से धनराशि वसूलने की बात सामने आई थी।

जब पुलिस टीम ने उस संदिग्ध नंबर का तकनीकी विश्लेषण किया, तो कड़ियां जुड़ती गईं और पता चला कि इस नंबर का सीधा संबंध बड़े पैमाने पर चल रही ऑनलाइन बेटिंग (सट्टेबाजी) गतिविधियों से है। इसके बाद मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर साइबर क्राइम थाना, कमिश्नरेट वाराणसी की टीम ने तत्काल जगतगंज स्थित दास नगर कॉलोनी के एक किराये के कमरे पर छापा मारा।

कानपुर के दो सटोरिए गिरफ्तार, भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य बरामद = किराये के कमरे पर दी गई दबिश के दौरान पुलिस ने मौके से दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों का विवरण इस प्रकार है : दीपक सिंह (उम्र 22 वर्ष), पुत्र राम बाबू वर्मा, निवासी ए-ब्लॉक ग्राइज, थाना गोविन्द नगर, रतनलाल नगर, जनपद कानपुर नगर। नवनीत सिंह (उम्र 25 वर्ष), पुत्र राम कमल सिंह, निवासी एमएल-267, बर्रा-05, थाना बर्रा, जनपद कानपुर नगर। साइबर क्राइम थाना, कमिश्नरेट वाराणसी ने इन अभियुक्तों के कब्जे से अपराध में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए हैं, जिनमें शामिल हैं : 09 एंड्रॉइड मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड, 01 एटीएम कार्ड

    गिरफ्तार किए गए मोबाइल फोनों की जब जांच की गई, तो पुलिस भी हैरान रह गई। मोबाइलों के अंदर ऑनलाइन बेटिंग से जुड़े पुख्ता डिजिटल साक्ष्य, विभिन्न बैंक खातों के क्यूआर कोड, लेनदेन (Pay-In/Pay-Out) का विवरण, यूजर आईडी, सट्टेबाजी पैनल का पूरा डैशबोर्ड और ग्राहकों को फंसाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले डिजिटल फ्लायर मिले हैं।

    समझिए, क्या था अपराध करने का तरीका? = पूछताछ में आरोपियों ने कुबूल किया कि वे अपने अन्य साथियों (प्रवीन उर्फ अक्षय और दिलावर) के साथ मिलकर विभिन्न ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइटों का संचालन करते थे। आकर्षक फ्लायर्स से जालसाजी: ये लोग सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर मैचों व अन्य खेलों के लुभावने डिजिटल पोस्टर भेजकर लोगों को सट्टा खेलने के लिए लालच देते थे। फर्जी आईडी का खेल: इच्छुक लोगों को ये बेटिंग आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराते थे। म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल: अपनी असली पहचान छिपाने के लिए ये गैंग फर्जी या दूसरों के नाम पर लिए गए सिम कार्ड और ‘म्यूल बैंक अकाउंट्स’ (दूसरों के किराए के खाते) का उपयोग करता था। पैसे जमा कराने और जीतने पर पेमेंट ट्रांसफर करने के लिए अलग-अलग मर्चेंट क्यूआर कोड का सहारा लिया जाता था।

    कानूनी कार्रवाई और फरार साथियों की तलाश जारी = साइबर क्राइम थाना, कमिश्नरेट वाराणसी ने बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और पुख्ता सबूतों के आधार पर दोनों अभियुक्तों के खिलाफ मु0अ0सं0 22/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2), 112(2) और 3/4 सार्वजनिक जुआ अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य फरार आरोपियों, संदिग्ध बैंक खातों और ऑनलाइन सट्टेबाजी के पूरे सिंडिकेट की गहराई से जांच कर रही है।

    इस हाईटेक गैंग को बेनकाब करने में साइबर क्राइम थाना, के निरीक्षक विजय नारायण मिश्र व निरीक्षक उदयवीर सिंह, उपनिरीक्षक विवेक सिंह व उपनिरीक्षक आलोक कुमार यादव, कांस्टेबल अंकित, चंद्रशेखर यादव, देवेंद्र यादव, अवनीश सिंह, अनिल मौर्या, महिला हेड कांस्टेबल पुनीता यादव व महिला कांस्टेबल प्रीती सिंह इन अधिकारियों और जवानों की मुख्य भूमिका रही।

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