वाराणसी: उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी दालमण्डी गली चौड़ीकरण परियोजना को लेकर जहाँ एक ओर प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय व्यापारियों की धड़कनें तेज हो गई हैं। इसी गहमागहमी के बीच दालमण्डी चौड़ीकरण के बीच नगर आयुक्त का फरमान, बिना पत्रांक संख्या व दिनांक के नगर आयुक्त का आदेशरूपी नोटिस हुआ चस्पा, व्यापारियों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।

बिना पत्रांक और तारीख के ‘अल्टीमेटम’ से दहशत – ताजा मामला नया चौक स्थित गुदड़ी मार्केट का है। यहाँ नगर निगम द्वारा दुकानों को ‘अति जर्जर’ घोषित करते हुए नोटिस चस्पा किए गए हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस नोटिस पर न तो कोई पत्रांक संख्या दर्ज है और न ही जारी करने की दिनांक।
नोटिस में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि ये दुकानें असुरक्षित हैं और ७ दिनों के भीतर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। दुकानदार मुन्नू लाल (दुकान संख्या 44) सहित अन्य अध्यासियों को जारी इस नोटिस में मुख्य अभियंता की ६ मई की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, लेकिन खुद नोटिस की तिथि गायब है।
व्यापारियों का सवाल, कब से गिनें ७ दिन? – स्थानीय व्यापारियों के सामने सबसे बड़ा संकट यह है कि जब नोटिस पर तारीख ही नहीं है, तो ७ दिनों की मियाद कब से शुरू मानी जाएगी? दालमण्डी चौड़ीकरण के बीच नगर आयुक्त का फरमान, बिना पत्रांक संख्या व दिनांक के नगर आयुक्त का आदेशरूपी नोटिस हुआ चस्पा, व्यापारियों में असमंजस की स्थिति को और गहरा बना रहा है। व्यापारियों का कहना है कि बिना वैधानिक औपचारिकताओं के इस तरह नोटिस चस्पा करना उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने जैसा है।
कोर्ट का स्टे और प्रशासन की तेजी – आपको बता दें कि ७ मई को उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने मोहम्मद नियामत अली खान ‘शम्शी’ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया था। कोर्ट ने एक स्वतंत्र आर्किटेक्ट की कमेटी गठित कर रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ने का निर्देश दिया था।
हालाँकि वह आदेश एक विशेष याचिका के लिए था, लेकिन सूत्रों के अनुसार लगभग ३२ अन्य याचिकाएं भी उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। ऐसे में व्यापारियों को उम्मीद थी कि प्रशासन कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करेगा, लेकिन नगर आयुक्त के इस नए और ‘अधूरे’ नोटिस ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है।
मुख्य बिंदु : अधूरा नोटिस: बिना पत्रांक और तिथि के नोटिस की कानूनी वैधता पर सवाल। समय सीमा का संकट: व्यापारियों को समझ नहीं आ रहा कि ध्वस्तीकरण की ७ दिन की अवधि कब खत्म होगी। कानूनी लड़ाई: हाईकोर्ट में लंबित ३२ से अधिक याचिकाओं के बीच प्रशासनिक कार्रवाई से तनाव।
दालमण्डी चौड़ीकरण के बीच नगर आयुक्त का फरमान, बिना पत्रांक संख्या व दिनांक के नगर आयुक्त का आदेशरूपी नोटिस हुआ चस्पा, व्यापारियों में असमंजस की स्थिति अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। व्यापारी अब इस मामले में फिर से कानूनी दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं।





