राहुल गांधी की ओर से उनके अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी और अनुज यादव ने अदालत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

वाराणसी। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी से इस वक्त की एक बड़ी कानूनी खबर सामने आ रही है। अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी में भगवान श्रीराम पर कथित तौर पर अमर्यादित टिप्पणी करने के मामले में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हालांकि, इस मामले में फिलहाल उन्हें थोड़ी सी मोहलत मिल गई है। वाराणसी की अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (चतुर्थ) / एमपी-एमएलए कोर्ट में विचाराधीन इस अर्जी पर गुरुवार को होने वाली सुनवाई टल गई है।

राहुल गांधी भगवान श्रीराम विवाद से जुड़े इस मामले में कांग्रेस नेता की तरफ से उनके अधिवक्ताओं ने कोर्ट में वकालतनामा दाखिल किया और अपना पक्ष रखने के लिए कुछ समय की मांग की।

राहुल गांधी के वकीलों ने मांगा समय, 24 जुलाई को होगी अगली सुनवाई = गुरुवार को कोर्ट में जैसे ही इस संवेदनशील मामले पर बहस शुरू होने वाली थी, तभी राहुल गांधी की ओर से उनके अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी और अनुज यादव ने अदालत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने राहुल गांधी की तरफ से आधिकारिक वकालतनामा पेश करते हुए जज साहब से कहा कि उन्हें इस मामले में अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए थोड़े वक्त की जरूरत है।

अदालत ने उनके इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया। एमपी-एमएलए कोर्ट ने अब राहुल गांधी भगवान श्रीराम विवाद से जुड़ी इस अर्जी पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 24 जुलाई तय कर दी है।

क्या है पूरा मामला? (Why is Rahul Gandhi in Controversy?) = अगर आप सोच रहे हैं कि यह पूरा विवाद आखिर शुरू कहाँ से हुआ, तो आपको थोड़ा पीछे फ्लैशबैक में जाना होगा। यह मामला एडवोकेट हरिशंकर पांडेय द्वारा दाखिल की गई एक अर्जी से जुड़ा है। अर्जी में लगाए गए आरोपों के मुताबिक : तारीख और जगह: 21 अप्रैल 2025 को राहुल गांधी अमेरिका के बोस्टन में स्थित प्रसिद्ध ब्राउन यूनिवर्सिटी (Brown University) पहुंचे थे। विवादित बयान: वहां छात्रों (Students) के साथ एक संवाद सत्र (Session) के दौरान राहुल गांधी ने कथित तौर पर भगवान श्रीराम को लेकर एक ऐसा बयान दिया, जिससे भारत में विवाद खड़ा हो गया। आरोप: आरोप है कि राहुल गांधी ने भगवान राम को महज ‘पौराणिक’ (Mythological) बताया था और उस काल की कहानियों को ‘काल्पनिक’ करार दिया था।

शिकायतकर्ता का कहना है कि राहुल गांधी ने न सिर्फ भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए, बल्कि अयोध्या के राम मंदिर का भी विरोध किया। विदेशी धरती पर दिए गए इस बयान से करोड़ों सनातनी हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।

लोअर कोर्ट से सत्र न्यायालय तक का कानूनी सफर = राहुल गांधी भगवान श्रीराम विवाद का यह कानूनी रास्ता काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इससे पहले 27 मई 2025 को निचली अदालत (अवर न्यायालय) ने इस परिवाद पत्र (Complaint) को ‘पोषणीय’ (Maintainable) न मानते हुए खारिज कर दिया था।

लेकिन एडवोकेट हरिशंकर पांडेय ने हार नहीं मानी। उन्होंने इस फैसले के खिलाफ जिला सत्र न्यायालय में एक रिवीजन अर्जी (पुनरीक्षण याचिका) दाखिल की। सत्र न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निचली अदालत के आदेश को पलटा और लोअर कोर्ट को इस अर्जी पर दोबारा नए सिरे से सुनवाई करने का आदेश दिया। अब यह मामला दोबारा वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट में पेंडिंग है, जहां राहुल गांधी को 24 जुलाई तक अपना पक्ष रखने की मोहलत मिली है।

निष्कर्ष (Conclusion) = राजनीति और धर्म का कनेक्शन भारत में हमेशा से संवेदनशील रहा है। ऐसे में राहुल गांधी भगवान श्रीराम विवाद पर कोर्ट का क्या रुख रहता है और 24 जुलाई को कांग्रेस नेता के वकील कोर्ट में क्या दलीलें पेश करते हैं, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहेंगी।

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